एशियाई खेलों से पहले भारतीय तीरंदाजों के सामने शंघाई विश्व कप में कड़ी चुनौती

एशियाई खेलों से पहले भारतीय तीरंदाजों के सामने शंघाई विश्व कप में कड़ी चुनौती

एशियाई खेलों से पहले भारतीय तीरंदाजों के सामने शंघाई विश्व कप में कड़ी चुनौती
Modified Date: May 4, 2026 / 07:01 pm IST
Published Date: May 4, 2026 7:01 pm IST

शंघाई, चार मई (भाषा) भारतीय तीरंदाज मंगलवार से यहां शुरू होने वाले विश्व कप के दूसरे चरण में खराब योजना, दिशाहीनता और पूर्णकालिक विदेशी कोच की अनुपस्थिति से घिरे माहौल में उतर रही है।

इस विश्व कप में मजबूत टीमों की मौजूदगी और इस साल होने वाले एशियाई खेलों को देखते हुए भारत की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

जापान के ऐची-नागोया में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेल तेजी से नजदीक आ रहे हैं, लेकिन भारत की तैयारी बिल्कुल भी भरोसेमंद नहीं दिख रही है।

सत्र की शुरुआत मेक्सिको में हुए विश्व कप के पहले चरण से हुई, जहां भारतीयों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। भारत के लिए एकमात्र सकारात्मक पहलू महिलाओं की कंपाउंड टीम का स्वर्ण पदक था।

दक्षिण कोरिया जैसी दिग्गज टीम की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय रिकर्व तीरंदाज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। यह प्रदर्शन हकीकत का आईना साबित हुआ, जहां तरुणदीप राय, अतनु दास, धीरज बोम्मादेवरा, दीपिका कुमारी और अंकिता भकत जैसे बड़े नाम भी पदक दौर तक नहीं पहुंच सके।

पुरुष रिकर्व टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई। महिला टीम ने शुरुआती मुकाबला जीता, लेकिन क्वार्टर फाइनल में तुर्की से हार गई।

व्यक्तिगत स्पर्धा में देश की सबसे सफल तीरंदाज दीपिका कुमारी दूसरे दौर में ही बाहर हो गईं, जबकि अंकिता, सिमरनजीत कौर और कुमकुम मोहोड़ तीसरे दौर से आगे नहीं बढ़ सकीं।

निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद भारतीय तीरंदाजी महासंघ ने शुरुआती विश्व कप के इस चरण के लिए भी वही टीम बरकरार रखी है।

एशियाई खेलों और आगामी विश्व कप चरणों के लिए चयन ट्रायल 15 मई से सोनीपत में प्रस्तावित हैं।

शंघाई में एक बार फिर भारत को अनुभवी लेकिन फॉर्म से जूझ रहे खिलाड़ियों पर निर्भर रहना होगा। दक्षिण कोरिया की टीम में ओलंपिक के पांच स्वर्ण पदक विजेताओं की मौजूदगी में मजबूत प्रतिस्पर्धा को देखते हुए रिकर्व वर्ग में पदक की उम्मीद बेहद कम नजर आती है।

एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए किर्गिस्तान, उजबेकिस्तान और सऊदी अरब जैसी टीमें भी अनुभव हासिल करने के लिए यहां पहुंची हैं।

युआनशेन स्पोर्ट्स सेंटर में कुल 320 तीरंदाज भाग लेंगे, जो पिछले वर्ष से 48 अधिक हैं।

भारत की सबसे बड़ी चिंता मैदान के बाहर की स्थिति है। एशियाई खेलों में चार महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन टीम के पास अब तक स्थायी मुख्य कोच नहीं है। खिलाड़ी अपने निजी कोचों के साथ तैयारी कर रहे हैं और ट्रायल में शीर्ष पर रहने वाला खिलाड़ी ही सपोर्ट स्टाफ तय करता है। यह व्यवस्था स्पष्ट रूप से दीर्घकालिक योजना की कमी को दर्शाती है।

ऐसे हालात में रिकर्व वर्ग से पदक की उम्मीद करना मुश्किल नजर आता है।

भारत की उम्मीदें एक बार फिर कंपाउंड तीरंदाजों पर टिकी होंगी। महिला टीम की अगुवाई ज्योति सुरेखा वेन्नम करेंगी, जिन्हें अदिति स्वामी और मधुरा धमांगांवकर का साथ मिलेगा।

पुरुष वर्ग में अभिषेक वर्मा, ओजस देवताले और कुशल दलाल से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी, खासकर मेक्सिको में प्री-क्वार्टर फाइनल में बाहर होने के बाद।

इस पृष्ठभूमि में शंघाई का टूर्नामेंट यह साफ कर देगा कि एशियाई खेलों से पहले भारतीय तीरंदाजी वास्तव में किस स्थिति में खड़ी है।

भारतीय टीम:

रिकर्व पुरुष: तरुणदीप राय, अतनु दास, धीरज बोम्मादेवरा और यशदीप भोगे।

रिकर्व महिला: दीपिका कुमारी, अंकिता भकत, सिमरनजीत कौर और कुमकुम मोहोड़।

कंपाउंड पुरुष: अभिषेक वर्मा, कुशल दलाल, ओजस देवताले और साहिल जाधव।

कंपाउंड महिला: ज्योति सुरेखा वेन्नम, अदिति स्वामी, प्रगति और मधुरा धमांगांवकर।

भाषा

आनन्द सुधीर

सुधीर


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