विश्व चैंपियनशिप में पदक की चाह में हर साल करीब 50,000 निशाने साधे: ट्रैप निशानेबाज जोरावर

विश्व चैंपियनशिप में पदक की चाह में हर साल करीब 50,000 निशाने साधे: ट्रैप निशानेबाज जोरावर

विश्व चैंपियनशिप में पदक की चाह में हर साल करीब 50,000 निशाने साधे: ट्रैप निशानेबाज जोरावर
Modified Date: April 27, 2026 / 05:46 pm IST
Published Date: April 27, 2026 5:46 pm IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) ट्रैप निशानेबाज जोरावर सिंह ने अपना करियर हिम्मत, कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर बनाया है और उन्हें पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक के रूप में बड़ी सफलता मिली। उनका कहना है कि यह सफलता कोई संयोग नहीं थी बल्कि यह हर साल करीब 50,000 ‘क्ले टारगेट’ पर निशाना साधने और हर तरह के मौसम में लगातार ट्रेनिंग करने का नतीजा थी।

इस चैंपियन ट्रैप निशानेबाज ने कहा, ‘‘मैंने यह सब और इससे भी अधिक किया है।’’

उन्होंने बताया कि उनके इस सफर में हर साल करीब 45,000 से 50,000 कारतूसों का इस्तेमाल करना पड़ा।

दिग्गज निशानेबाजों करणी सिंह और मानवजीत सिंह संधू के बाद 48 साल के जोरावर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले सिर्फ तीसरे भारतीय ट्रैप निशानेबाज बने। इससे पहले 2006 में क्रोएशिया के जागरेब में मानवजीत ने स्वर्ण पदक जीता था।

जोरावर के लिए पिछले साल एथेंस में मिला यह बहुप्रतीक्षित पदक तीन दशकों से भी अधिक लंबे उनके पेशेवर निशानेबाजी करियर में की गई सारी मेहनत का नतीजा था।

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के 75 साल पूरे होने के मौके पर सोमवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जोरावर ने कहा, ‘‘मैं 2022 से ही इस काम में जुटा हुआ हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय खेलों के बाद मेरी योजना एकदम साफ थी कि फाइनल में जगह बनानी है। मैंने अपने लिए एकदम सटीक लक्ष्य तय किए थे क्योंकि मुझे पता था कि फाइनल में जगह पक्की करने के लिए मुझे कड़ी टक्कर वाले मुकाबलों में ‘शूट-ऑफ’ से गुजरना पड़ेगा।’’

जोरावर ने कहा, ‘‘क्योंकि तभी पदक जीतना मुमकिन हो पाता। मेरा पहला लक्ष्य सिर्फ फाइनल तक पहुंचना था और उसके बाद मेरा ध्यान सिर्फ अपनी प्रक्रिया पर भरोसा करने और नतीजों की चिंता नहीं करने पर था… और देखिए आज हम यहां हैं।’’

अब जोरावर का अगला लक्ष्य 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया इसी साल के आखिर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप से शुरू होगी।

जोरावर ने कहा, ‘‘अभी विश्व चैंपियनशिप होनी है, उसके बाद अगला साल भी काफी व्यस्त और मुश्किल भरा रहने वाला है। साथ ही निशानेबाजी के नियमों में भी कई बदलाव हुए हैं जिन्हें हमें अच्छी तरह समझना होगा।’’

दिल्ली के इस निशानेबाज ने कहा, ‘‘जाहिर है जो कम समय में सबसे अच्छी तरह से ढल जाएगा वही सफल होगा।’’

इस साल सितंबर-अक्टूबर में जापान में एशियाई खेल भी होने हैं लेकिन इस बात की संभावना कम है कि यह चैंपियन निशानेबाज भारतीय दल में शामिल होगा।

जोरावर ने कहा, ‘‘यह (एशियाई खेलों में चयन) तय करना राष्ट्रीय महासंघ का काम है—उनकी चयन नीति क्या है और वे अंततः किसे चुनते हैं। एक खिलाड़ी के तौर पर हमें उसका पालन करना होता है।’’

जोरावर को मई में कजाखस्तान के अल्माटी में होने वाले आईएसएसएफ विश्व कप और जुलाई में लोनाटो में होने वाले आईएसएसएफ विश्व कप के लिए ‘जीरो’ निशानेबाज के तौर पर शामिल किया गया है जिसका मतलब है कि वह बिना पदक के लिए पात्र हुए प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।

भाषा सुधीर

सुधीर


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