बहु- खेल आयोजनों में खिलाड़ियों के लिये हमेशा मौजूद रहें, सरकार ने खेल प्रशासकों से कहा
बहु- खेल आयोजनों में खिलाड़ियों के लिये हमेशा मौजूद रहें, सरकार ने खेल प्रशासकों से कहा
अहमदाबाद, नौ जनवरी (भाषा) भारत के खेल प्रशासकों को यहां खेल प्रशासन कांक्लेव के दौरान शुक्रवार को कहा गया कि बहु – खेल आयोजनों को ‘परिवार के साथ छुट्टियों’ की तरह नहीं समझे और खिलाड़ियों के लिये हमेशा उपलब्ध रहें । उन्हें एशियाई खेलों के दल के लिये नाम भी 15 जनवरी तक देने के लिये कहा गया है ।
कांक्लेव में खेलमंत्री मनसुख मांडविया , भारतीय ओलंपिक संघ और राष्ट्रीय खेल महासंघों के शीर्ष अधिकारी , गुजरात के उप मुख्यमंत्री और खेल मंत्री हर्ष सांघवी और खेल सचिव हरि रंजन राव मौजूद थे ।
राव ने देश की दस साल की पदक रणनीति का ब्यौरा देते हुए कहा ,‘‘ यह शर्मनाक होगा कि अधिकारियों का बड़ा दल जाये और खिलाड़ी के लिये जरूरत के समय कोई भी उपलब्ध नहीं हो । उन्हें खिलाड़ियों के लिये सौ फीसदी उपलब्ध रहना होगा । अगर आप इसे रिश्तेदारों के साथ छुट्टियों की तरह ले रहे हैं तो कृपया मत जाइये । हमें आपकी जरूरत नहीं है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के लिये चयन के मानदंड पहले ही दे दिये गए हैं । जापान में होने वाले एशियाई खेलों की आयोजन समिति ने नाम देने के लिये 30 जनवरी की समय सीमा दी है ।’’
राव ने कहा ,‘‘ आईओए ने आपसे कहा होगा कि 15 जनवरी तक नाम देने हैं । क्या आप सभी तैयार हैं । अगर आप नाम नहीं देते हैं तो खेलों से बाहर रहना होगा । नाम देने पर , उसमें बदलाव नहीं होगा । जापानी सुनने वाले नहीं हैं ।’’
भारतीय अधिकारियों की अक्सर खिलाड़ी आलोचना करते हैं कि बड़े टूर्नामेंटों में जरूरत के समय वे उपलब्ध नहीं होते जबकि प्रशासकों का बड़ा दल खिलाड़ियों के साथ जाता है ।
एशियाई खेल 19 सितंबर से चार अक्टूबर के बीच जापान में होंगे । वहीं राष्ट्रमंडल खेल जुलाई अगस्त में होंगे ।
राव ने कहा कि एशियाई खेलों में इस बार 111 पदक मिलने का अनुमान है जो हांगझोउ में हुए पिछले खेलों में मिले 106 पदकों से अधिक है ।
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में हालांकि 20 पदकों की ही उम्मीद है क्योंकि हॉकी, बैडमिंटन, निशानेबाजी और कुश्ती जैसे खेल बजट में कटौती के कारण हटा दिये गए हैं ।
राव ने कहा ,‘‘ यह गलत भी हो सकता है या इससे बेहतर भी हो सकता है लेकिन काफी प्रयास करने होंगे । राष्ट्रमंडल खेलों में कटौती के कारण तीन स्वर्ण समेत 22 पदकों की ही उम्मीद है ।’’
उन्होंने यह भी कहा ,‘‘ हमें खिलाड़ियों को शिष्टाचार की ट्रेनिंग भी देनी होगी क्योंकि जापान सामाजिक शिष्टाचार और खान पान की आदतों को लेकर काफी संवेदनशील देश है । हम एक भी गलती नहीं कर सकते ।’’
मांडविया ने कहा,‘‘ 2036 ओलंपिक में खेलने वाले खिलाड़ी अभी स्कूल में होंगे । हमें प्रतिभाओं की जल्दी पहचान करनी होगी । सरकार मदद को तैयार है लेकिन आपको भी सहयोग करना होगा । हमें इन मसलों पर चर्चा के लिये हर महीने बैठक करनी होगी ।’’
राव ने अपने संबोधन में पदक रणनीति का ब्यौरा देते हुए कहा ,‘‘ 2036 में हमें 12 से 14 स्वर्ण और 30 से 35 कुल पदक लेने होंगे ताकि शीर्ष दस में आ सकें । वहीं 2048 ओलंपिक में 35 . 40 स्वर्ण समेत सौ पदक जीतने होंगे ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ सभी प्रमुख देशों ने अपनी मेजबानी में हुए ओलंपिक में प्रदर्शन में सुधार किया है । चीन ने 2008 बीजिंग ओलंपिक से पहले ‘प्रोजेक्ट 119’ शुरू किया था और 119 पदकों के लिये पांच खेलों एथलेटिक्स, तैराकी, नौकायन, कयाकिंग . केनोइंग और पाल नौकायन पर फोकस किया ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ ये वो खेल हैं जिनमें चीन पदक नहीं जीतता रहा है । बीजिंग ओलंपिक में उसने 48 स्वर्ण पदक जीते और इन पांच खेलों में आठ स्वर्ण पदक अपने नाम किये । इसी तरह का फोकस हमें भी चाहिये और हमें सोचना होगा कि हम अभी कहां हैं ।’’
उन्होंने कहा कि सुधार के लिये हर खेल में ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र , प्रतिभाओं की तलाश के लिये एआई आधारित व्यवस्था और खेल विज्ञान और रिसर्च के लिये राष्ट्रीय संस्थान जरूरी है ।
उन्होंने कहा कि पुलेला गोपीचंद की अगुवाई वाली समिति ने कोचिंग में कुछ सुधारों के सुझाव दिये हैं जिन पर जल्दी अमल किया जायेगा । उन्होंने कहा ,‘‘ हम कोचिंग प्रमाणन बोर्ड बनाने की भी योजना बना रहे हैं जो जमीनी स्तर पर, इंटरमीडिएट और एलीट स्तर पर कोचों को प्रमाण पत्र देगा ।’’
राव ने राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधियों से दैनंदिनी प्रशासन से इतर सोचने के लिये कहा । उन्होंने कहा कि हर महासंघ को एक प्रदेश को वित्तीय सहायता के लिये जोड़ना चाहिये, जैसे ओडिशा मॉडल से हॉकी को पुनर्जीवित किया गया ।
भाषा मोना नमिता
नमिता

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