नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम कोच सैंटियागो नीवा ने राष्ट्रमंडल खेलों में सात स्वर्ण और तीन रजत सहित रिकॉर्ड 10 पदकों के प्रदर्शन को भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि इससे यह साबित होता है कि भारतीय मुक्केबाजी सही दिशा में आगे बढ़ रही है और टीम अगले ओलंपिक सहित हर बड़े टूर्नामेंट में चुनौती पेश करने में सक्षम है।
नीवा ने रविवार को ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता क्योंकि इससे पहले भारतीय टीम एशियाई चैंपियनशिप में भी 15 पदक (पांच स्वर्ण, तीन रजत और आठ कांस्य के साथ कुल 16 पदक) जीत चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘हर बड़ा खेल हमारे लिए महत्वपूर्ण होता है। यह ओलंपिक नहीं है, लेकिन हमने यहां मजबूत यूरोपीय देशों को हराया। इंग्लैंड हमेशा पदक तालिका में हमसे आगे रहता था, लेकिन इस बार हमने छह में से अधिकांश मुकाबलों में उन्हें मात दी और पदक तालिका में उनसे दोगुना बेहतर प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’
नीवा ने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में सफलता की गारंटी नहीं होती, लेकिन मौजूदा प्रदर्शन से यह भरोसा जरूर मिला है कि भारतीय मुक्केबाज बड़े मंचों पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘इससे यह स्पष्ट होता है कि हम सभी बड़ी प्रतियोगिताओं, यहां तक कि अगले ओलंपिक में भी अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।’
नीवा ने कहा कि खिलाड़ियों का ध्यान अब अगले लक्ष्य पर है और टीम राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता में नहीं उलझेगी।
उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए हमेशा अगली प्रतियोगिता सबसे महत्वपूर्ण होती है। अब एशियाई खेल सामने हैं, जहां प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी होगी। इसके बाद विश्व चैंपियनशिप होगी, जो पहला ओलंपिक क्वालीफायर है। हम अगर वहां क्वालीफाई नहीं कर पाए तो एशियाई क्वालीफायर होगा। इसलिए खिलाड़ियों को हर बार खुद को नए सिरे से साबित करना पड़ता है।’
नीवा ने खुलासा किया कि टीम का लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था।
उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य चार स्वर्ण पदकों के साथ राष्ट्रमंडल खेलों का सर्वश्रेष्ठ अभियान करना था, लेकिन खिलाड़ियों ने उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण पदक जीत लिए। हमें अपनी टीम की क्षमता पर भरोसा था, लेकिन इतनी बड़ी सफलता की कोई गारंटी नहीं थी।’
नीवा ने बताया कि शुरुआती दौर में खिलाड़ियों को अनावश्यक चेतावनी मिली रही थीं, लेकिन कोचिंग स्टाफ ने तुरंत तकनीकी बदलाव किए।
उन्होंने कहा, ‘शुरुआती मुकाबलों में हमें कुछ अनावश्यक चेतावनी मिलीं। हमने टूर्नामेंट के दौरान ही उनमें सुधार किया और सेमीफाइनल तथा फाइनल में खिलाड़ी कहीं अधिक साफ-सुथरी मुक्केबाजी करते नजर आए। यही बदलाव हमारे बेहतर प्रदर्शन की बड़ी वजह बना।’
नीवा ने कहा कि भारतीय मुक्केबाजों की सबसे बड़ी विशेषता दबाव की स्थिति में संयम बनाए रखना रही।
उन्होंने कहा, ‘हम खिलाड़ियों से कहते हैं कि दबाव में भी शांत रहें। अच्छी मुक्केबाजी करने वाले खिलाड़ी केवल आक्रामक होकर नहीं, बल्कि रणनीति के साथ मुकाबला जीतते हैं। जब प्रतिद्वंद्वी थकता है तो उसे तकनीक से मात देना आसान होता है।’
उन्होंने प्रिया घंघास (महिला 60 किग्र) का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने तीनों मुकाबलों के अंतिम राउंड में बेहतर मुक्केबाजी करते हुए जीत हासिल की।
नीवा ने प्रीति पवार (महिला 51 किग्रा) और साक्षी चौधरी (महिला 54 किग्रा) के प्रदर्शन की विशेष तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों दोनों में विश्वस्तरीय मुक्केबाजी की।
उन्होंने कहा, ‘प्रीति ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल में अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरी तरह मात दी। वह हर मुकाबले में सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज साबित हुई।’
नीवा ने कहा, ‘‘साक्षी को शुरुआती मुकाबलों में उन्हें कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल में शानदार वापसी की। फाइनल से पहले मुझे इंग्लैंड की मुक्केबाज को लेकर चिंता थी, लेकिन साक्षी ने रूबी व्हाइट के खिलाफ विश्वस्तरीय प्रदर्शन करते हुए उसे कोई मौका नहीं दिया।’
भाषा
आनन्द नमिता
नमिता