दिलवारा गांव की बेटियां, फुटबॉल से गढ़ रही पहचान
दिलवारा गांव की बेटियां, फुटबॉल से गढ़ रही पहचान
जयपुर, 17 मई (भाषा) नसीराबाद क्षेत्र के दिलवारा गांव की लड़कियां फुटबॉल के जरिए अपनी पहचान गढ़ रही हैं। कभी बंजर जमीन रही यह जगह अब सपनों का मैदान बन चुकी है जहां रोजाना शाम को 100 से अधिक लड़कियां घंटों अभ्यास करती हैं।
गांव के युवाओं और खिलाड़ियों के सामूहिक प्रयास से कांटों और पत्थरों से भरी जमीन को खेल मैदान में बदला गया है। घास का मैदान तैयार करने का काम भी जारी है।
स्थानीय निवासी राकेश प्रजापत ने बताया कि उनका सपना फुटबॉलर बनने का था लेकिन आर्थिक कारणों से अधूरा रह गया। अब वे चाहते हैं कि गांव की बेटियां उनका सपना पूरा करें। पांच साल पहले केवल पांच लड़कियां खेलती थीं आज यह संख्या सौ से अधिक हो चुकी है। इनमें से एक लड़की राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी है और 6-7 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।
फल की दुकान चलाने वाले कोच जयंत रोज़ाना 2-3 घंटे लड़कियों को प्रशिक्षित करते हैं। उन्होंने भी राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेला है और वर्तमान में बीपीएड कोर्स के अंतिम वर्ष में हैं। उनका कहना है कि अब यह मैदान बड़े टूर्नामेंट की मेज़बानी कर सकता है।
कृष्णा जाट तीन साल से अभ्यास कर रही हैं और राज्य स्तर पर तीन बार तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो बार खेल चुकी हैं। उनका कहना है कि परिवार का सहयोग उनके संकल्प को और मज़बूत करता है।
सोनम चौधरी ने बताया कि वह रोजाना मुफ्त कोचिंग के साथ अभ्यास करती हैं और उनका सपना है कि राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर गांव और जिले का नाम रोशन करें। वहीं अंजु चौधरी पशुपालन की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ ज़िला स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रही हैं।
दिलवारा गांव की ये बेटियां इस बात की मिसाल हैं कि संकल्प, सामुदायिक सहयोग और बाधाओं को पार करने की इच्छाशक्ति कैसे युवा लड़कियों को खेलों के माध्यम से अपना भविष्य गढ़ने की ताक़त देती है।
भाषा बाकोलिया सुधीर
सुधीर

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