CBSE OSM controversy: 12वीं बोर्ड के छात्रों को बड़ी राहत, अब इस चीज के लिए नहीं देने होंगे ज्यादा पैसे, मार्किंग सिस्टम को लेकर भी आया बड़ा अपडेट
CBSE OSM controversy: स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार ने OSM सिस्टम की सटीकता को लेकर उठाई गई चिंताओं को दूर किया।
CBSE OSM controversy/Image Credit: AI
- CBSE बोर्ड 12वीं का रिजल्ट आने के बाद से ही कई तरह की चर्चा हो रही थी।
- छात्र-छात्राओं ने ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)’ की वजह से उन्हें उम्मीद से कम नंबर मिलने का आरोप लगाया था।
- स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार ने छात्रों के इन आरोपों का जवाब दिया है।
CBSE OSM controversy: नई दिल्ली: CBSE बोर्ड 12वीं का रिजल्ट आने के बाद से ही कई तरह की चर्चा हो रही थी। छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाते हुए कहा था कि, इस बार कॉपियों की जांच में नए डिजिटल सिस्टम ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM)’ की वजह से उन्हें उम्मीद से कम नंबर मिले हैं। इसके साथ ही छात्रों ने आरोप लगाया था कि, उन्होंने अच्छे पेपर किए थे और 90-95 प्रतिशत तक मार्क्स आने की उम्मीद थी, लेकिन उनका रिजल्ट काफी कम आया। इतना ही नहीं कई स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर अपनी मार्कशीट शेयर कर नाराजगी जताई थी। वहीं अब स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और OSM सिस्टम की सटीकता को लेकर उठाई गई चिंताओं को दूर किया।
संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, ‘जैसा कि आप जानते हैं, सीबीएसई ने हाल ही में कक्षा 12वीं के नतीजे घोषित किए हैं। इस बार मार्किंग OSM के जरिए की गई थी और उसके बाद कुछ चिंताएं सामने आई हैं। कुछ छात्रों को लगता है कि पास होने का प्रतिशत कम हो गया है और पिछले साल के मुकाबले यह लगभग 3% घटकर 88% से 85% पर आ गया है। कुछ छात्रों को यह भी लगता है कि वो ज्यादा अंकों के हकदार थे, लेकिन उन्हें कम अंक मिले हैं। इसलिए हम इन चिंताओं और गलतफहमियों के बारे में आपके सामने कुछ स्पष्टीकरण देना चाहेंगे।’
OSM सिस्टम पहली बार नहीं हुआ लागू
CBSE OSM controversy: शिक्षा सचिव ने कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग न तो कोई नया कॉन्सेप्ट है और न ही यह पहली बार लागू किया गया है। (CBSE OSM controversy) CBSE ने सबसे पहले 2014 में OSM सिस्टम शुरू किया था। हालांकि उस समय तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं के कारण इस प्रक्रिया को तुरंत जारी रखना मुमकिन नहीं माना गया था। हमने इस साल इसे सफलतापूर्वक फिर से शुरू किया है।’
13,000 उत्तर पुस्तिकाओं की हुई ऑफ-लाइन मार्किंग
संजय कुमार ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग समस्या के संबंध में कहा, ‘मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान त्रुटियां पाई गईं और लगभग 13,000 उत्तर पुस्तिकाओं की ऑफ-लाइन मार्किंग हुई। इस बार जब 12वीं कक्षा की परीक्षाएं आयोजित की गईं, तो उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया और उनकी PDF कॉपियां बनाई गईं। परीक्षा देने वाले 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया और स्कैनिंग के दौरान सुरक्षा के तीन स्तर भी बनाए गए। इसका एक फायदा ये हुआ है कि कुल अंकों की गणना (totalling) में कभी-कभी जो गलतियां हो जाती थीं, वो पूरी तरह से खत्म हो गई हैं. यह फैसला लिया गया और शिक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षित भी किया गया।’
उन्होंने कहा, ‘यह भी पाया गया कि हमारे पास लगभग 13,000 ऐसी उत्तर पुस्तिकाएं थीं, जिन्हें हमने पाया कि चाहे कितनी भी बार स्कैन किया जाए, उनमें कुछ अस्पष्टता बनी रहती थी, क्योंकि इस्तेमाल की गई स्याही बहुत हल्के रंग की थी। इसलिए स्कैन करने के बाद हम उन्हें स्पष्ट रूप से पढ़ नहीं पा रहे थे। (CBSE OSM controversy) शिक्षकों को निर्देश दिया गया कि उन 13,000 उत्तर पुस्तिकाओं को अलग निकालकर मैन्युअल रूप से जांचा जाए और मैन्युअल जांच के बाद उन पर प्राप्त अंकों को हमने दर्ज किया। मैं यह कहना चाहूंगा कि सुरक्षा स्तर और संबंधित मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ के माध्यम से की गई अंक-गणना पूरी तरह से सटीक हो।’
री-चेकिंग के लिए लगेगी मात्र इतनी फीस
CBSE OSM controversy: संजय कुमार कहते हैं, ‘हम किसी भी ऐसे छात्र से 100 रुपये की फीस लेंगे, जो अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखना चाहता है। अगर वो अपने पेपरों का वैरिफिकेशन करवाना चाहते हैं तो 100 रुपए ये की अलग फीस लगेगी और किसी विशिष्ट प्रश्न के उत्तर की दोबारा जांच (री-चेकिंग) के लिए 25 रुपए की फीस लगेगी। हमने यह तय किया है कि अगर जांच प्रक्रिया के दौरान किसी छात्र के अंक बढ़ते हैं या उनमें ऊपर की ओर संशोधन होता है, तो हम उनके द्वारा पुनर्मूल्यांकन के लिए भुगतान की गई पूरी राशि वापस कर देंगे।’
वह ये भी कहते हैं, “चाहे वह शिक्षा मंत्रालय हो या CBSE, हमारे सभी बच्चों का कल्याण और उनकी चिंताएं हमारे लिए सर्वोपरि हैं। इसलिए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी बच्चे को, किसी भी कारण से, ऐसा न लगे कि उसे उसकी योग्यता या परीक्षा के दौरान लिखे गए उत्तरों में दर्शाए गए वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले अंकों से कम अंक मिले हैं। (CBSE OSM controversy) CBSE के ढांचे के भीतर पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान हमेशा से मौजूद रहा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि दिए गए अंक, जिसमें अंकों का कुल योग भी शामिल है, बिल्कुल सटीक हों।’
फीस को किया गया है कम
CBSE OSM controversy: शिक्षा सचिव ने कहा, ‘वह प्रक्रिया जिसके लिए पहले 700 रुपए लगते थे, जिसके तहत हम आपको आपकी आंसर शीट की एक कॉपी देते थे, उसकी फीस अब घटाकर सिर्फ 100 रुपए कर दी गई है। इसके अलावा वैलिडेशन की फीस, जो पहले 500 रुपए थी, उसे भी घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी एक सवाल का जवाब दोबारा चेक करवाना चाहते हैं, (CBSE OSM controversy) तो आपको 225 रुपये देने होंगे. हालांकि अगर किसी भी वजह से दोबारा मूल्यांकन की प्रक्रिया में यह पता चलता है कि आपके नंबर बढ़ गए हैं, तो हम आपकी दी हुई पूरी रकम आपको वापस कर देंगे। हमें अपने बच्चों की भलाई, कल्याण और मानसिक स्थिति की ज्यादा चिंता है. पैसा जरूरी है, लेकिन इस मामले में यह हमारी प्राथमिकता नहीं है।’
वह यह भी कहते हैं, ‘हम आपको बस आपकी आंसर शीट की एक कॉपी दे देंगे। सिर्फ आंसर शीट को देखकर ही यह साफ हो जाएगा कि मार्किंग कैसे की गई थी। जब आप उसे देख लेंगे, तो आपको खुद ही पता चल जाएगा कि कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि आपको ज्यादा नंबर मिलने चाहिए थे. चूंकि आंसर शीट पहले ही स्कैन की जा चुकी हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि दोबारा जांच की कोई जरूरत है या कोई और तरीका मौजूद है।’
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