विश्व स्तर पर जीत हासिल करने के लिए देश में स्क्वाश का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र होना जरूरी: तन्वी

विश्व स्तर पर जीत हासिल करने के लिए देश में स्क्वाश का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र होना जरूरी: तन्वी

विश्व स्तर पर जीत हासिल करने के लिए देश में स्क्वाश का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र होना जरूरी: तन्वी
Modified Date: July 5, 2026 / 02:58 pm IST
Published Date: July 5, 2026 2:58 pm IST

मुंबई, पांच जुलाई (भाषा) स्क्वाश की स्टार खिलाड़ी तन्वी खन्ना का मानना ​​है कि अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के कौशल को बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर सफल बनाने के लिए देश में इस खेल का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना जरूरी है।

सितंबर-अक्टूबर में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में शामिल दुनिया की 74वें नंबर की खिलाड़ी तन्वी ने कहा कि भारत को उन शीर्ष देशों से सीखना चाहिए जिन्होंने लगातार चैंपियन तैयार किए हैं।

यहां स्क्वाश पीएसए चैलेंजर टूर खिताब जीतने वाली तन्वी ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि हम उन देशों से सीख सकते हैं जिनका चैंपियन तैयार करने का इतिहास रहा है लेकिन मकसद यह है कि हम सीखें और वही कौशल अपने साथी भारतीयों तक पहुंचाएं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि अगर हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भारत के लिए पदक जीते तो कोच और खिलाड़ियों का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र भारत में ही होना चाहिए।’’

तन्वी ने कहा, ‘‘आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का यही एकमात्र तरीका है और मिस्र जैसे देशों में ऐसा ही है जबकि भारत में अभी इसकी कमी है।’’

तन्वी इस बात से सहमत नहीं हैं कि पूर्ण कालिक विदेशी कोच भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर कर सकते हैं लेकिन उन्होंने विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘एक और चुनौती बुनियादी ढांचे की है। मेरी अकादमी में छह-सात ऐसे बच्चे हैं जो इसी साल भारत में नंबर एक रहे हैं, साथ ही एक विश्व जूनियर पदक विजेता और कई एशियाई जूनियर पदक विजेता भी हैं।’’

तन्वी ने कहा, ‘‘हमें दिल्ली में एक पूर्ण ग्लास कोर्ट की जरूरत है। सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं ग्लास कोर्ट पर होती हैं और उन पर पारंपरिक कोर्ट से बहुत अलग तरह से खेला जाता है। जब हम टूर्नामेंट के लिए विदेश जाते हैं तो हम सभी को ग्लास कोर्ट के हिसाब से ढलने में मुश्किल होती है क्योंकि हमने उस पर अभ्यास नहीं किया होता।’’

तन्वी टॉप्स कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि वह भारतीय स्क्वाश रैकेट्स महासंघ (एसआरएफआई) और दिल्ली स्क्वाश संघ की ओर से और अधिक पहल देखना चाहेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘अभी मुझे अपनी कोचिंग के खर्च के लिए कोई कोष नहीं मिलता। मेरे स्क्वाश कोच भारतीय (ध्रुव धवन) हैं और फिटनेस ट्रेनर मिस्र के (अहमद फरागल्लाह) हैं। मेरे फिजियोथेरेपिस्ट और फिटनेस का खर्च भी कवर नहीं होता है।’’

तन्वी ने कहा, ‘‘मेरे पास कोई प्रायोजक नहीं है… ऐसे में अगर महासंघ और दिल्ली राज्य संघ और पहल करें तो यह वाकई बहुत फायदेमंद होगा।’’

तन्वी ने दो गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए फरीदा वालिद को 3-2 से हराया और उन्होंने कहा कि यह खिताब उन्हें आगामी एशियाई खेलों में मदद करेगा जहां वह जकार्ता और हांगझोउ में क्रमशः टीम रजत और कांस्य पदक जीतने के बाद तीसरा महाद्वीपीय पदक जीतने की कोशिश करेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह जीत मुझे एशियाई खेलों के लिए तैयार करेगी। मैंने अभी तक व्यक्तिगत वर्ग में कोई पदक नहीं जीता है। मैंने सिर्फ टीम स्पर्धाओं में पदक जीता है।’’

तन्वी ने कहा, ‘‘इस बार मैं निश्चित तौर पर इसे लक्ष्य बनाऊंगी। मुझे पता है कि मैं यह कर सकती हूं और यह जीत निश्चित रूप से अगले कुछ महीनों की मेरी तैयारी में मेरा हौसला बढ़ाएगी। जिस तरह से यह जीत मिली और जिस तरह से मैंने वापसी की वह बेहद जबरदस्त था।’’

भाषा सुधीर नमिता

नमिता


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