कोलकाता में मेसी से जुड़े कार्यक्रम में हुए विवाद का मुझे ‘बलि का बकरा’ बनाया गया : सतद्रु दत्ता
कोलकाता में मेसी से जुड़े कार्यक्रम में हुए विवाद का मुझे ‘बलि का बकरा’ बनाया गया : सतद्रु दत्ता
कोलकाता, 11 मई (भाषा) लियोनेल मेसी से जुड़े कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में पिछले वर्ष दिसंबर में हुए कार्यक्रम को लेकर आयोजक सतद्रु दत्ता ने सोमवार को दावा किया कि उन्हें पूरे प्रकरण में “बलि का बकरा” बनाया गया, जबकि असली जिम्मेदारों को बचाया गया।
दत्ता ने कहा कि आयोजन के दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप, सुरक्षा में गंभीर चूक और प्रशासनिक खामियों के कारण पूरा कार्यक्रम अव्यवस्थित हो गया।
दत्ता ने पीटीआई को दिए बयान में दावा किया कि 13 दिसंबर को आयोजित यह कार्यक्रम केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत ‘जेड-प्लस सुरक्षा’ प्रोटोकॉल में होना था, जिसमें मेसी की मौजूदगी में मैदान पर केवल सीमित लोगों की ही पहुंच तय थी।
उन्होंने आरोप लगाया, “हमारी तरफ से हर चीज बेहद योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों के साथ 16 से 20 बैठकें हुई थीं। लेकिन जब मैं मेसी के साथ मैदान में पहुंचा तो वहां सैकड़ों अनधिकृत लोग बिना अनुमति या पास के मौजूद थे।”
दत्ता ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल के तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने आयोजन में हस्तक्षेप किया और अतिरिक्त पास जारी करने का दबाव बनाया।
उन्होंने कहा, “अतिरिक्त एक्रेडिटेशन कार्ड देने का दबाव बनाया गया, लेकिन हमने मना कर दिया क्योंकि यह पहले ही पुलिस के साथ तय हो चुका था। इसके बावजूद अनधिकृत लोग लगातार मैदान में आते रहे।”
उनके अनुसार, जब दर्शक और कुछ लोग बार-बार खिलाड़ियों के बेहद करीब जाकर सेल्फी लेने लगे, तो रोड्रिगो डी पॉल जैसे खिलाड़ियों को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई।
दत्ता ने कहा, “इसी दौरान माहौल इतना असहज हो गया कि मेसी और उनकी पूरी टीम ने मैदान छोड़ने का फैसला कर लिया।”
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “अगर उनके प्रबंधन में कोई खामी थी, तो उनकी टीम ने हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में बिना किसी समस्या के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक कैसे आयोजित किया? इन शहरों में मंत्रियों और आमंत्रित मेहमानों ने जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाई।”
दत्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें बाद में उड़ान भरने से रोका गया और गिरफ्तारी भी हुई, जबकि असली जिम्मेदारों से पूछताछ तक नहीं की गई।
उन्होंने कहा, “मुझे फंसाया गया, जबकि बाकी लोगों को बचा लिया गया।”
उन्होंने यह भी मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, क्योंकि उनके अनुसार यह एक “पूर्ण पुलिस विफलता” का मामला है।
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने चार मई को चुनाव परिणाम प्रकाशित होने के बाद ही अपनी बात क्यों रखी, तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अब बोलने और सबको सच्चाई बताने का समय आ गया है।”
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का बचाव करते हुए दत्ता ने कहा कि कोलकाता में अपनाई गई प्रक्रिया अन्य जगहों पर अपनाई गई प्रक्रियाओं के अनुरूप थी। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आमंत्रित व्यक्तियों की सूची पहले से ही स्पष्ट रूप से तय कर ली गई थी और अधिकारियों के साथ साझा की गई थी।
दत्ता के आरोपों के बाद अरूप बिस्वास से संपर्क नहीं हो सका, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दत्ता अपनी विफलता को छिपाने के लिए पूर्व मंत्री को निशाना बना रहे हैं और वह स्वयं इतने बड़े आयोजन में व्यवस्था बनाए रखने में असफल रहे।
उन्होंने कहा, “मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए हम इस पर और कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन बिस्वास, तत्कालीन खेल मंत्री होने के नाते राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए उस कार्यक्रम में गए थे।”
भाषा आनन्द सुधीर
सुधीर

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