ईरान के सामने दुश्मन की सरजमीं पर फुटबॉल की जंग में उतरने की चुनौती

ईरान के सामने दुश्मन की सरजमीं पर फुटबॉल की जंग में उतरने की चुनौती

ईरान के सामने दुश्मन की सरजमीं पर फुटबॉल की जंग में उतरने की चुनौती
Modified Date: June 4, 2026 / 06:01 pm IST
Published Date: June 4, 2026 6:01 pm IST

अंताल्या, चार जून (एपी) दुनिया भर की दिग्गज फुटबॉल टीमें विश्व कप की तैयारी में जुटी है लेकिन ईरान की टीम के सामने अलग ही चुनौती है जिसे ऐसे देश में जाकर खेलना है जिसका सामना उनका देश रणभूमि में भी कर रहा है ।

तुर्की में ईरान के अभ्यास शिविर के दौरान टीम के दो सदस्यों ने बताया कि किस तरह युद्ध का असर उनकी तैयारियों पर पड़ा है ।

विश्व कप 2018 और 2022 में ईरान के लिये खेल चुके मिडफील्डर सईद इजातोलाही ने कहा ,‘‘ ईमानदारी से कहूं तो यह आसान नहीं है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ यह मेरा तीसरा विश्व कप होगा लिहाजा मेरे और अन्य खिलाड़ियों के लिये फिर भी थोड़ा आसान है लेकिन हम सभी के लिये आखिर में तो यह मुश्किल है ही । हम लगातार खबरों पर नजर रखे हुए हैं और राजनीतिक हालात का असर खिलाड़ियों पर पड़ सकता है ।’’

ईरान की टीम दो सप्ताह से अधिक समय से तुर्की में है और कुछ खिलाड़ी वीजा आवेदन जमा करने अंकारा में अमेरिकी दूतावास गए । उनके शिविर तक मीडिया की पहुंच नहीं है और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों से कम ही बात करते हैं ।

ईरान का ठिकाना विश्व कप में मैक्सिको होगा ।

उसे इस सप्ताह मैक्सिको रवाना होना है । पहले उसे एरिजोना के टक्सन में तैयारी करनी थी लेकिन बाद में कैलिफोर्निया की सीमा से सटे मैक्सिको के शहर तिजुआना में स्थानांतरित किया गया ।

ईरान पहले दो मैच लॉस एंजिलिस के पास खेलेगा जहां बड़ी संख्या में ईरानी लोग रहते हैं और अधिकांश मौजूदा सरकार के खिलाफ हैं ।

सईद ने कहा ,‘‘ हमें उम्मीद है कि हमारा मैच देखने बड़ी संख्या में लोग आयेंगे । अपेक्षायें काफी हैं तो दबाव भी होगा । उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करके दिखाएंगे कि ईरानी दुनिया के हर कठिन काम के लिये तैयार हैं ।’’

चौबीस वर्ष के मोहम्मद घोरबानी का यह पहला विश्व कप है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ हमारे लिये हालात अलग है लेकिन हम फुटबॉल खिलाड़ी हैं और हमें टूर्नामेंट के लिये तैयार रहना है । हमें यह भी पता है कि युद्ध के कारण हमारे देश के लोग कितने संकट में है और हम अच्छा खेलकर उन्हें मुस्कुराने के मौके देना चाहते हैं ।’’

अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया जिसमें उसके शीर्ष नेता और कई आला अधिकारी मारे गए । ईरान ने जवाब में इस्राइल, अमेरिकी सेना और खाड़ी के अरब देशों को निशाना बनाया । इसने फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी कब्जा कर रखा है जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है ।

मामूली युद्धविराम के बावजूद ईरान और अमेरिका ने अभी तक स्थायी तौर पर युद्ध बंद नहीं किया है और हमले जारी हैं ।

ईरान को 14 जून से पहले अमेरिका जाने की जरूरत नहीं है । उसे ग्रुप जी में 15 जून को न्यूजीलैंड से लॉस एंजिलिस में खेलना है । इसके बाद 21 जून को बेल्जियम और 26 जून को सिएटल में मिस्र से खेलना है ।

एपी मोना सुधीर

सुधीर


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