इटली के मूर्तिकार ने तैयार की है विश्व कप ट्रॉफी
इटली के मूर्तिकार ने तैयार की है विश्व कप ट्रॉफी
मिलान, 16 जुलाई (एपी) फीफा विश्व कप ट्रॉफी का डिजाइन इटली के एक मूर्तिकार ने तैयार किया है। उन्होंने इस सर्पिलाकार आकृति में खेल से जुड़ी तीन भावनाओं को दर्शाने की कोशिश की है जिसमें खिलाड़ियों का संघर्ष, प्रशंसकों का उल्लास और जीत का क्षण शामिल हैं।
अमेरिका में चल रहे मौजूदा विश्व कप में रविवार को यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी अर्जेंटीना और स्पेन में से किसी एक के नाम होगी।
जब ब्राजील ने 1970 में अपना तीसरा विश्व कप जीतकर मूल ट्रॉफी पर स्थायी अधिकार हासिल कर लिया था तो विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा ने एक नए डिजाइन के लिए खुली प्रतियोगिता शुरू की। इसके बाद सिल्वियो गज़ानिगा ने मिलान के ब्रेरा इलाके में स्थित अपने स्टूडियो में ट्रॉफी का डिजाइन तैयार किया।
यह डिजाइन अब दुनिया भर के फुटबाल प्रेमियों की आंखों में रच बस चुका है। इसमें दो मानव आकृतियां पृथ्वी को पकड़े हुए हैं। गज़ानिगा का 2016 में निधन हो गया था।
इस मूर्तिकार के बेटे जियोर्जियो गज़ानिगा ने कहा, ‘‘जब उन्होंने कप को डिजाइन करना शुरू किया तो वह कई चित्र बना रहे थे। इसके बाद ही उन्होंने अंतिम डिजाइन तैयार किया था।’’
पहले विश्व कप (1930) के लिए जो ट्रॉफी तैयार की गई थी उसमें यूनान की देवी नाइकी का चित्र था। टूर्नामेंट के संस्थापक के नाम पर इसे जूल्स रिमेट ट्रॉफी के नाम से जाना जाता था। ब्राजील ने पूर्व में तय किए गए नियमों के अनुसार तीन विश्व कप जीतने वाला पहला देश बनने के बाद मूल ट्रॉफी पर स्थायी अधिकार हासिल कर लिया था। इसके बाद फीफा ने नई ट्रॉफी तैयार की थी।
जूल्स रिमेट ट्रॉफी दो बार चोरी भी हुई थी। पहली बार 1966 में इंग्लैंड के पहली बार चैंपियन बनने के बाद इसे सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया गया था और यह चोरी हो गई थी। फीफा के अनुसार इसे दक्षिण लंदन में एक झाड़ी के नीचे पिकल्स नामक कुत्ते ने खोजा था।
ब्राजील के ट्रॉफी पर स्थायी अधिकार होने के बाद 1983 में ब्राजील फुटबॉल महासंघ के मुख्यालय से इसे फिर से चुरा लिया गया था। यह ट्रॉफी आज तक बरामद नहीं हुई है और माना जाता है कि इसे पिघला दिया गया है।
विश्व कप फाइनल के बाद विजेता टीम का कप्तान जिस ट्रॉफी को हासिल करता है वह 36 सेंटीमीटर (14 इंच) ऊंची है और 18 कैरेट सोने से बनी है। यह हरे रंग के दो छल्लों वाले आधार पर टिकी है। यह छल्ले खेल के मैदानों के प्रतीक हैं।
टूर्नामेंट के बाद मूल ट्रॉफी फीफा को वापस भेज दी जाती है। फीफा इसे अपने स्विस मुख्यालय में रखता है। विजेता टीम को स्वदेश ले जाने के लिए सोने की परत चढ़ी हुई प्रतिकृति मिलती है।
फीफा ने अब नियम बदल दिए हैं जिनके अनुसार तीन बार के विजेता को मूल ट्रॉफी रखने का अधिकार नहीं है।
एपी
पंत
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