पदक के लिए परिवार और दोस्तों का दबाव खत्म, अब खुलकर खेलूंगा: भाला फेंक एथलीट रोहित

पदक के लिए परिवार और दोस्तों का दबाव खत्म, अब खुलकर खेलूंगा: भाला फेंक एथलीट रोहित

पदक के लिए परिवार और दोस्तों का दबाव खत्म, अब खुलकर खेलूंगा: भाला फेंक एथलीट रोहित
Modified Date: September 29, 2026 / 09:50 am IST
Published Date: September 29, 2026 9:50 am IST

(तस्वीरों के साथ) … फिलेम दीपक सिंह …

नागोया, 29 सितंबर (भाषा) एशियाई खेलों में भाला फेंक का कांस्य पदक जीतकर रोहित यादव ने वर्षों से झेल रहे दबाव से राहत महसूस करते हुए कहा कि वह अब बिना किसी दबाव के खुलकर खेल सकेंगे। पच्चीस वर्षीय रोहित ने सोमवार को बारिश से प्रभावित मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में 84.35 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता। श्रीलंका के स्टार रुमेश पाथिरागे ने 88.55 मीटर के प्रयास से स्वर्ण, जबकि भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया। रोहित ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘मैंने इससे पहले किसी बड़ी चैंपियनशिप में पदक नहीं जीता था। किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में यह मेरा पहला पदक है। मैं बहुत खुश हूं। आखिरकार मेरा खाता खुल गया।’’ रोहित ने कहा, ‘‘मैं ऐसे परिवार से आता हूं, जहां खेलों का माहौल नहीं है। इसलिए घर में लोग कहते थे, ‘तुम इतने साल से इतनी मेहनत कर रहे हो, लेकिन कोई पदक नहीं जीत पाए। आखिर तुम्हारे पास है क्या।’’ उन्होंने कहा, ‘‘परिवार और दोस्तों की ओर से मुझ पर जो दबाव था, वह इस पदक के बाद अब खत्म हो गया है। मैं कई वर्षों से बहुत दबाव में था। मुझे नहीं पता कि बड़े पदक जीतने से मैं बार-बार क्यों चूक जाता था। लेकिन एशियाई खेलों के इस पदक के बाद अब मैं बिना किसी दबाव के खेलूंगा। मैं खुलकर प्रतिस्पर्धा करूंगा।’’ रोहित का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 87.68 मीटर है। जून में भुवनेश्वर में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में 87.05 मीटर के शानदार प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी लगातार बड़े प्रयास नहीं कर पाने पर उन्होंने निराशा जताई थी। यही कमी उन्हें बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक से दूर करती रही थी। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में वह 81.56 मीटर के साधारण प्रयास के साथ सातवें स्थान पर रहे थे। इसके बाद उन्होंने वापसी करते हुए विश्व एथलेटिक्स ‘सिल्वर लेवल कॉन्टिनेंटल टूर’ प्रतियोगिता में 87.68 मीटर के प्रयास से खिताब जीता। रोहित ने कहा, ‘‘‘यह विश्वस्तरीय खिलाड़ियों वाला मुकाबला था। लेकिन भारत में अपनी पिछली प्रतियोगिता में मैंने 87.68 मीटर भाला फेंका था, जो विश्वस्तरीय प्रयास था। मैं ठीक हूं और पदक जीतने से खुश हूं, लेकिन बहुत संतुष्ट नहीं हूं, क्योंकि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सका। मेरा प्रयास उस स्तर का नहीं था, जिसकी मुझे उम्मीद थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगले साल मेरा लक्ष्य 88, 89 और 90 मीटर से अधिक की दूरी हासिल करना है। मैं अगले साल डायमंड लीग, एशियाई चैंपियनशिप और चीन में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगा। इस साल का प्रदर्शन ठीक रहा। मैंने दो बार 87 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका।’’ रोहित ने कहा, ‘‘उम्मीद है कि भविष्य में मैं पदक का रंग बदल पाऊंगा।’’ बारिश के कारण मैदान पर फिसलन के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थी और इसी वजह से भाले को सही तरीके से रिलीज नहीं कर पा रहा था। लेकिन परिस्थितियां सभी खिलाड़ियों के लिए समान थीं, इसलिए मैं इसे बहाना नहीं बनाऊंगा।’’ रोहित ने इस पदक को अपने पिता को समर्पित करते हुए कहा, ‘‘‘मैं यह पदक अपने पिता को समर्पित करता हूं। मेरे पिता ने बहुत संघर्ष देखा है। यहां आने के बाद मैंने उन्हें फोन किया था। उन्होंने कहा था कि जिस तरह खेलना पसंद है, उसी तरह खेलो। मैंने उनसे कहा था कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बड़ा प्रयास नहीं कर सका, लेकिन अब मैं उन्हें बताऊंगा कि मैंने पदक जीत लिया है। वह बहुत खुश होंगे।’’ भाषा आनन्द पंतपंत


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