फुटबॉल की बादशाहत के लिये मेस्सी की अर्जेंटीना के सामने स्पेन की दीवार
फुटबॉल की बादशाहत के लिये मेस्सी की अर्जेंटीना के सामने स्पेन की दीवार
न्यूयॉर्क, 18 जुलाई (भाषा) एक ओर लियोनेल मेस्सी का करिश्मा है तो दूसरी तरफ टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल गंवाने वाली स्पेन का अभेद डिफेंस । विश्व फुटबॉल की बादशाहत के लिये मौजूदा चैम्पियन अर्जेंटीना का सामना रविवार को स्पेन से होगा तो ‘आक्रमण और बचाव’ की रोचक जंग देखने को मिलेगी ।
2010 की चैम्पियन स्पेन ने टूर्नामेंट में फाइनल तक के सफर में सिर्फ एक गोल क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम के खिलाफ गंवाया है जबकि अर्जेंटीना ने अब तक इस टूर्नामेंट में सात मैचों में सबसे ज्यादा 19 गोल दागे हैं ।
यह मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग अलग फुटबॉल शैलियों का भी है । अर्जेंटीना ने पूरे टूर्नामेंट में दबाव के क्षणों से निकलकर जीत हासिल की है, जबकि स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण, मजबूत रक्षापंक्ति और सामूहिक खेल के दम पर फाइनल तक का सफर तय किया है।
स्पेन ने सेमीफाइनल में खिताब की सबसे प्रबल दावेदार कीलियन एमबाप्पे की फ्रांस को 2 . 0 से हराकर जाहिर कर दिया कि वह किसी के रसूख से घबराने वाली टीम नहीं है ।
खिताबी मुकाबले को बार्सीलोना के पूर्व नंबर 10 मेस्सी और वर्तमान में 10 नंबर जर्सी पहनने वाले स्पेन के लामिन यमाल के बीच मुकाबले के तौर पर भी देखा जा रहा है । फाइनल से पहले मेस्सी और यमाल की वायरल हुई दो दशक पुरानी तस्वीर ने इसे और रोचक मोड़ दे दिया है जिसमें मेस्सी बाथटब में ‘बेबी यमाल’ को नहलाते दिख रहे हैं ।
अब देखना यह है कि अर्जेंटीना 1958 और 1962 में ब्राजील के बाद लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने वाली टीम बनती है या स्पेन एक बार फिर ‘जाइंटकिलर’ साबित होता है ।
पहली बार 48 टीमों के इस विश्व कप में यूरोपीय चैम्पियन स्पेन और दक्षिण अमेरिका की चैम्पियन टीम अर्जेंटीना का सफर एक सा नहीं रहा ।
छह बार की चैम्पियन अर्जेंटीना और मेस्सी को इस सफर में पक्षपात की भी तोहमतें झेलनी पड़ी लेकिन मेस्सी ने अब तक आठ और विश्व कप कैरियर में 21 गोल दागकर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया । इस टूर्नामेंट में उनके और एमबाप्पे के आठ गोल हैं लेकिन चार में सहायता करके मेस्सी ‘गोल्डन बूट’ की दौड़ में फिलहाल आगे हैं ।
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में दूसरे गोल में जिस तरह से उन्होंने सूत्रधार की भूमिका निभाई, उससे विरोधी भी दंग रह गए । ग्रुप चरण में लगातार तीनों मैच जीतकर अर्जेंटीना की शुरूआत अच्छी रही ।
वहीं पहले नॉकआउट मैच में पांच लाख की आबादी वाले केप वर्दे ने उसे खासा परेशान किया और आखिरकार अतिरिक्त समय में जाकर अर्जेंटीना को 3 . 2 से जीत मिली । इसके बाद मिस्र ने 79वें मिनट में उसे दो गोल से पीछे रखा और आखिरी 13 मिनट में तीन गोल करके लियोनेल स्कालोनी की टीम जीती लेकिन रैफरिंग पर सवाल उठे ।
क्वार्टर फाइनल में स्विटजरलैंड को अतिरिक्त समय में 3. 1 से हराया और सेमीफाइनल में पिछड़ने के बाद आखिरी मिनटों में एंजो फर्नांडिस और मार्तिनेज के गोल के दम पर अर्जेंटीना अंतिम चार में पहुंचा ।
दूसरी ओर पहले ही ग्रुप मैच में स्पेन को केप वर्दे ने गोलरहित ड्रॉ पर रोककर सभी को चौंका दिया था । इसके बाद दो मैच जीतकर नॉकआउट में पहुंची स्पेन ने आस्ट्रिया को 3 . 0 से हराया और अंतिम 16 में क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल को रवाना किया ।
बेल्जियम को हराने के बाद स्पेन ने सेमीफाइनल में फ्रांस के एमबाप्पे को बांधे रखा और अर्जेंटीना को इसी गलती से बचना होगा चूंकि अब स्पेन के निशाने पर मेस्सी होंगे ।
मेस्सी ने फाइनल से पहले इतना ही कहा ,‘‘ अर्जेंटीना अपना सब कुछ झोंक देगी ।’’
वहीं रौड्री ने कहा ,‘‘ हम विश्व कप जीतने के इरादे से ही आये हैं और हमें खुद पर यकीन है कि हम जीत सकते हैं । हमने दिग्गजों को हराया है और उसी लय को कायम रखना होगा ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ फ्रांस के खिलाफ मैच एक टीम के रूप में हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में से एक था । लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ और बेहतर करना होगा क्योंकि वे चैम्पियन हैं । मुझे यकीन है कि हम ऐसा कर सकेंगे ।’’
कागजों पर बराबरी के दिख रहे इस मुकाबले में यदि अर्जेंटीना का अनुभव और मेस्सी का जादू चलता है तो ट्रॉफी दक्षिण अमेरिका जा सकती है, लेकिन यदि स्पेन ने अपनी लय और अनुशासित खेल बरकरार रखा तो यूरोप की नई बादशाहत स्थापित हो सकती है। यही अनिश्चितता इस फाइनल को यादगार बनाने के लिए काफी है।
भाषा
मोना आनन्द
आनन्द

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