मीराबाई ने जूनियर के साथ भारतीय भारोत्तोलन को आगे बढ़ाया, लेकिन डोपिंग का डंक भी डसता रहा
मीराबाई ने जूनियर के साथ भारतीय भारोत्तोलन को आगे बढ़ाया, लेकिन डोपिंग का डंक भी डसता रहा
(अपराजिता उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 27 दिसंबर (भाषा) भारतीय भारोत्तोलन एक बार फिर मीराबाई चानू की अटूट प्रतिभा के इर्द-गिर्द घूमता रहा, जिनका विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक डोपिंग संबंधी चिंताओं और सीनियर स्तर पर अन्य खिलाड़ियों की निराशाजनक प्रदर्शन के कारण वर्ष 2025 में इस खेल के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
एक साल से अधिक समय तक चोट के कारण खेल से दूर रहने के बाद वापसी करते हुए तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता ने स्वदेश में आयोजित राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
इसके बाद उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता, जिससे खेल की भारत में ध्वजवाहक के रूप में उनकी स्थिति की पुष्टि हुई।
पेरिस ओलंपिक खेलों के बाद खेल से बाहर रही चानू ने अगस्त में अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर प्रतियोगिता में सफल वापसी की, हालांकि उनका मुकाबला कमजोर खिलाड़ियों से था।
उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए अपने खाते में तीसरा विश्व चैंपियनशिप पदक जोड़ा। मीराबाई ने नॉर्वे के फोर्डे में खेली गई इस प्रतियोगिता में 199 किलोग्राम के कुल भार उठाकर रजत पदक हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 84 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 115 किलोग्राम वजन उठाया।
चानू के अलावा इस सत्र में अन्य सी़नियर भारोत्तोलकों ने कोई उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं किया। हालांकि भारतीय खिलाड़ियों ने राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में कमजोर प्रतिस्पर्धा के बावजूद पदक जीतने में कामयाबी हासिल की, लेकिन उनका प्रदर्शन विश्व स्तरीय मानकों के करीब भी नहीं पहुंच पाया।
एशियाई चैंपियनशिप में भी निरुपमा देवी ने महिलाओं के 64 किलोग्राम वर्ग में चौथा स्थान हासिल किया, जबकि दिलबाग सिंह पुरुषों के 96 किलोग्राम वर्ग की प्रतियोगिता में नौवें स्थान पर रहे जिससे इस बात का पता चलता है कि भारत केवल राष्ट्रमंडल स्तर पर ही अपना दबदबा कायम कर सकता है।
डोपिंग का लगातार बढ़ता खतरा एक बार फिर भारतीय भारोत्तोलन पर डंसता रहा। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने 2024 के आंकड़ों के आधार पर लगातार तीसरे वर्ष भारत का डोपिंग में रिकॉर्ड सबसे खराब रहा। इसमें भारोत्तोलन में डोपिंग उल्लंघन करने वाले खिलाड़ियों की संख्या दूसरे स्थान पर है।
निराशा के माहौल के बीच जूनियर और युवा भारोत्तोलकों के उदय ने आशा की किरण जगाई है क्योंकि भारतीय भारोत्तोलन अगले साल होने वाले एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेगा।
कोयल बार ने अगस्त में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में दो युवा विश्व रिकॉर्ड बनाए, जबकि प्रितीस्मिता भोई ने युवा एशियाई खेलों में लड़कियों के 44 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के दौरान क्लीन एंड जर्क में युवा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया।
भाषा
पंत
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