अनाथ भारोत्तोलक इसाक ने चोटों से उबरकर खेलो इंडिया ट्राइबल खेलों में स्वर्ण जीता
अनाथ भारोत्तोलक इसाक ने चोटों से उबरकर खेलो इंडिया ट्राइबल खेलों में स्वर्ण जीता
रायपुर, 29 मार्च (भाषा) मिजोरम के युवा भारोत्तोलक इसाक मालसावमटलुआंगा सोलह वर्ष के होने से पहले ही अपने माता-पिता दोनों को खोने के बाद लगभग खेल छोड़ने की कगार पर पहुंच गए थे लेकिन इस त्रासदी और कमर की चोट से उबरकर उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल खेल 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता ।
इसाक ने क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन किया। स्नैच में दूसरे स्थान पर रहने के बाद उन्होंने कुल 235 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जीत के तुरंत बाद उनके चाचा ने उन्हें गले लगा लिया, जो इस युवा खिलाड़ी के जीवन में एक मार्गदर्शक की तरह रहे हैं।
दोहरी त्रासदी ने मिजोरम के इस किशोर को अंदर तक तोड़ दिया था, लेकिन उनके बचपन के कोच और चाचा-चाची के सहारे ने उनके खेल करियर को संभाल लिया।
इसाक के पिता हेमिंग मालसावमटलुआंगा की 2018 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, उसी साल उन्होंने भारोत्तोलन में कैरियर की शुरुआत की थी। परिवार के इकलौते बेटे होने के कारण उनके सामने यह सवाल खड़ा हो गया था कि वह खेल जारी रखें या परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए कमाई पर ध्यान दें।
इसाक ने साई मीडिया से बातचीत में बताया,” उस समय मेरे बचपन के कोच सोमा ने मुझे बहुत प्रेरित किया और खेल जारी रखने के लिए कहा।”
फिर 2024 में हिमाचल प्रदेश में आयोजित युवा राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने के बाद जब उनका प्रदर्शन बेहतर होने लगा, तभी एक और निजी झटका लगा। उनकी मां को कैंसर का पता चला, जिससे परिवार पर भावनात्मक और आर्थिक दबाव बढ़ गया।
इस कठिन समय में उनके चाचा और चाची उनका सहारा बने। आइजोल के रामह्लुन वेंगथर इलाके में एक छोटे से रेस्तरां में काम करने वाला यह दंपति इसाक को अपने साथ ले आया और उसकी पढ़ाई और खेल दोनों को निर्बाध जारी रखने में मदद की।
लेकिन उसी साल इसाक की मां का निधन हो गया, जिसने इस युवा खिलाड़ी को पूरी तरह तोड़ दिया।
इसाक ने कहा, “अपने माता-पिता दोनों को खोना मुझे अंदर से पूरी तरह तोड़ गया था। मैंने लगभग तय कर लिया था कि खेल छोड़ दूंगा, लेकिन मेरे चाचा और कोच ने एक बार फिर मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।”
इसाक 2024 से इम्फाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे हैं और साथ ही आइजोल से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के जरिए कक्षा 12 की पढ़ाई भी कर रहे हैं।
धीरे-धीरे उनके प्रयास रंग लाने लगे। मोदीनगर में 2025 में आयोजित जूनियर प्रतियोगिता में उन्होंने एक और रजत पदक जीता और बाद में उसी वर्ष राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से पहले उनकी तैयारियों में भी चुनौतियां कम नहीं थीं। अभ्यास के दौरान उन्हें पीठ में चोट लग गई थी, जिसके चलते उनके कोच ने उन्हें टूर्नामेंट से दूर रहने की सलाह दी थी।
लेकिन इसाक ने हार नहीं मानी और रायपुर में मंच पर उतरकर अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा ,‘‘मेरे पिता के निधन के बाद से मेरे चाचा हमेशा प्रतियोगिताओं में मेरे साथ जाते हैं। वह यहां भी मेरे साथ थे। जैसे ही मैंने पदक जीता, उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया। उस पल मुझे एहसास हुआ कि वह कितने खुश थे।”
भाषा मोना
मोना

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