पडिक्कल ने शतक लगाकर तीसरे नंबर पर अपनी जगह पक्की की, जायसवाल और पंत नहीं चले

पडिक्कल ने शतक लगाकर तीसरे नंबर पर अपनी जगह पक्की की, जायसवाल और पंत नहीं चले

पडिक्कल ने शतक लगाकर तीसरे नंबर पर अपनी जगह पक्की की, जायसवाल और पंत नहीं चले
Modified Date: August 8, 2026 / 07:25 pm IST
Published Date: August 8, 2026 7:25 pm IST

कोलंबो, आठ अगस्त (भाषा) देवदत्त पडिक्कल ने अपने कलात्मक खेल का शानदार नमूना पेश करके श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ अभ्यास मैच के दूसरे दिन शतक लगाया और इस तरह से पहले टेस्ट मैच के लिए भारत की अंतिम एकादश में अपनी जगह पक्की कर दी लेकिन अनुभवी ऋषभ पंत और उनके साथी विकेटकीपर ध्रुव जुरेल बल्लेबाजी के लिए अनुकूल परिस्थितियों का फायदा नहीं उठा पाए।

भारत ने दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक अपनी पहली पारी में 90 ओवर में आठ विकेट पर 357 रन बनाए। पडिक्कल के नाबाद 142 रन और अनुभवी रविंद्र जडेजा की 63 रन (रिटायर्ड आउट) की जुझारू पारी भारतीय पारी का आकर्षण रहे। इनके अलावा मानव सुथार (41) ने भी अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया।

खेल आगे बढ़ने के साथ पिच बल्लेबाजी के लिए काफी आसान हो गई थी और पडिक्कल ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए 18 चौके लगाए। उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

पडिक्कल का श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करना तय है क्योंकि इस नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए पहली पसंद के बल्लेबाज साई सुदर्शन पैर के अंगूठे की चोट से समय पर उबर न पाने के कारण श्रृंखला से बाहर हो गए हैं।

यशस्वी जायसवाल (00) दिन की दूसरी गेंद पर बाएं हाथ के तेज गेंदबाज विश्व फर्नांडो (42 रन देकर एक विकेट) पर शॉट लगाने की कोशिश में आउट हो गए, जिसके बाद केएल राहुल (40) और पडिक्कल ने दूसरे विकेट के लिए 96 रन जोड़े।

राहुल ने क्रीज पर अपने पांव अच्छी तरह से जमा लिए थे तो दूसरी तरफ पडिक्कल को खेलते देखना भी बेहद मनोरंजक था। उन्होंने फुल लेंथ गेंदों पर कुछ कवर ड्राइव लगाकर शुरुआत की और फिर प्वाइंट के आगे और पीछे दोनों तरफ कुछ शानदार कट शॉट खेले।

पडिक्कल ने विशेष रूप से दाएं हाथ के तेज गेंदबाज इशिता विजेसुंदरा को निशाने पर रखा और उन पर कई चौके लगाए। तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका मशहूर ‘नटराज शॉट’ (विशेष मुद्रा में लगाए गए हुक और पुल शॉट) भी देखने को मिला।

पडिक्कल की बल्लेबाजी की खासियत यह थी कि उन्हें अपने शॉट को सही ढंग से खेलने का फैसला करने में लगभग एक सेकंड का अतिरिक्त समय मिल जाता था। उनका डिफेंस भी मजबूत हो गया है और स्पिनरों के खिलाफ उनका फुटवर्क लाजवाब है।

उन्होंने ऑफ स्पिनर रमेश मेंडिस की गेंद पर पुल शॉट खेलकर केवल 121 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और फिर रिटायर्ड हर्ट हो गए।

तब तक उन्होंने जडेजा के साथ तीसरे विकेट के लिए 72 रन जोड़ लिए थे, जिन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि विदेशों में मध्य क्रम के बल्लेबाज के रूप में वह महत्वपूर्ण खिलाड़ी क्यों हैं।

भारत के लिए दूसरे दिन की सबसे बड़ी निराशा ऋषभ पंत (02) रहे, जिन्होंने एक बार फिर ऑफ स्पिनर मेंडिस (77 रन देकर दो विकेट) के खिलाफ लॉन्ग-ऑन के ऊपर से शॉट खेलने का प्रयास किया लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर लॉन्ग-ऑफ की ओर चली गई।

अगर पंत आक्रामक शॉट खेलकर आउट हुए तो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के बाद ऑफ-स्पिनर के सामने ध्रुव जुरेल (01) की तकनीकी कमजोरी एक बार फिर उजागर हो गई। उन्होंने आगे बढ़कर रक्षात्मक शॉट खेलने के प्रयास में शॉर्ट स्क्वायर लेग पर कैच दिया।

लेकिन मानव सुथार ने जडेजा का अच्छा साथ दिया। इन दोनों ने 76 रन जोड़कर पारी को संभाला। पडिक्कल दिन के आखिर में फिर बल्लेबाजी करने आए और चार चौके और लगाए। सारांश जैन ने रिटायर्ड हर्ट होने से पहले 22 रन बनाए जबकि गुरनूर बराड़ ने 18 गेंद पर नाबाद 36 रन की पारी खेली जिसमें चार छक्के शामिल हैं।

भाषा

पंत नमिता

नमिता


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