2036 तक 5000 खिलाड़ियों को टॉप्स में लाने की योजना, पदक वाले खेलों पर फोकस : मांडविया

2036 तक 5000 खिलाड़ियों को टॉप्स में लाने की योजना, पदक वाले खेलों पर फोकस : मांडविया

2036 तक 5000 खिलाड़ियों को टॉप्स में लाने की योजना, पदक वाले खेलों पर फोकस : मांडविया
Modified Date: April 13, 2026 / 02:32 pm IST
Published Date: April 13, 2026 2:32 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) खेल मंत्रालय ने टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप्स) में पदक जीतने वाले खेलों पर फोकस रखते हुए दस साल की पदक रणनीति तैयार करके 2036 ओलंपिक तक पांच हजार खिलाड़ियों को इस योजना में शामिल करने का लक्ष्य रखा है ।

खेलमंत्री मनसुख मांडविया सोमवार को यहां अनौपचारिक बातचीत में कहा ,‘‘ टॉप्स पूल को मजबूत बनाने की जरूरत है और जिन खेलों में अधिक ओलंपिक पदक दाव पर हैं , उन पर फोकस किया जाना चाहिये ।’’

उन्होंने आगे कहा ,‘‘ यह अध्ययन जरूरी है कि पदक जीतने के प्रयासों में कहां कमी रह जाती है और इसी के तहत पदक रणनीति तैयार की गई है । ऐसा नहीं होना चाहिये कि जिन खेलों में अधिक पदक नहीं है, उनके खिलाड़ी टॉप्स में ज्यादा संख्या में हैं और जहां पदक ज्यादा मिलने हैं, उनके खिलाड़ी नहीं हैं ।’

मांडविया ने कहा ,‘‘ मसलन ओलंपिक में एक्वाटिक्स में 165 पदक, साइकिलिंग में 66 और जिम्नास्टिक में 57 पदक दाव पर होते हैं जिनके खिलाड़ी टॉप्स में नहीं हैं । पहले डेवलपमेंट समूह में इन खिलाड़ियों की संख्या बढाई जायेगी और एक ढांचागत योजना के लिये अगले पांच साल में उन्हें कोर समूह में लाया जायेगा।’’

उन्होंने कहा ,‘‘अगले दस साल की पदक रणनीति के तहत 2032 तक तीन हजार और 2036 तक पांच हजार खिलाड़ियों को टॉप्स में लाने का लक्ष्य है । इसमें कोर और डेवलपमेंट समूह के बीच अनुपात 1 : 5 का रहेगा ।’’

इस समय टॉप्स में कुल संख्या 399 है जिसमें कोर 51, कोर पैरा 62, डेवलपमेंट समूह में 166 , टारगेट एशियन गेम्स में 57 और हॉकी में 63 हैं । पिछले साल यह संख्या 245 थी ।

खेलमंत्री ने यह भी बताया कि खेलो इंडिया ट्राइबल खेलों से 80 प्रतिभाओं की पहचान हुई है जिन्हें आगे प्रशिक्षण के लिये उत्कृष्टता केंद्र भेजा जायेगा ।

उन्होंने कहा ,‘‘ खेलो इंडिया और अस्मिता से पहचानी गई प्रतिभाओं को टॉप्स डेवलपमेंट समूह में शामिल करने के लिये व्यापक रोडमैप तैयार किया जा रहा है जिसके जरिये भविष्य में टॉप्स के कोर समूह का हिस्सा बन सकेंगे ।’’

भाषा

मोना पंत

पंत


लेखक के बारे में