मोदी ने भारत के गलत मानचित्र पर आपत्ति जताने के लिए लवलीना की सराहना की, मीराबाई को लड्डू खिलाया

मोदी ने भारत के गलत मानचित्र पर आपत्ति जताने के लिए लवलीना की सराहना की, मीराबाई को लड्डू खिलाया

मोदी ने भारत के गलत मानचित्र पर आपत्ति जताने के लिए लवलीना की सराहना की, मीराबाई को लड्डू खिलाया
Modified Date: August 10, 2026 / 12:24 pm IST
Published Date: August 10, 2026 12:24 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ मुलाकात के दौरान ग्लास्गो के एक रेस्तरां में भारत के गलत मानचित्र पर आपत्ति जताने पर मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने रविवार को हुई इस बातचीत के दौरान पदक विजेताओं से खेलों की तैयारी और ग्लास्गो में उनके अनुभवों के बारे में सुना। इस दौरान भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने पिछले चार वर्षों के अपने संघर्ष के बारे में भी मोदी को बताया।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोमवार को इसका लगभग 10 मिनट का वीडियो जारी किया। इस अवसर पर खेल मंत्री मनसुख मांडविया, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पी टी उषा भी उपस्थित थीं।

मोदी ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली लवलीना से पूछा, ‘‘क्या हुआ वो रेस्टोरेंट वाले से झगड़ा कर रही थी?’’

असम की मुक्केबाज ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘‘हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और यह खेलों का आखिरी दिन था। यह खुशी का अवसर था। हम जश्न मना रहे थे और मुझे देश का गलत मानचित्र देखना अच्छा नहीं लगा। मैंने विनम्रतापूर्वक उन्हें बताया और उन्होंने बदलाव भी कर दिया।’’

मोदी ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि यह समझदारी भरा काम था, खासकर ऐसे समय में जब वह अपनी जीत का जश्न मना रही थीं।

भारत ने इन खेलों में 39 पदक जीते जिनमें 13 स्वर्ण पदक शामिल हैं। भारत ने सात स्वर्ण पदक मुक्केबाजी में जीते।

मोदी ने तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता से कहा, ‘‘खेलों के समापन और जश्न के माहौल में उस नक्शे के महत्व को पहचान पाना। मैं आपको सच बता सकता हूं, वह वीडियो साधारण नहीं था। लोग उसे लंबे समय तक याद रखेंगे।’’

ग्लास्गो में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलोग्राम का रिकॉर्ड भार उठाकर स्वर्ण पदक जीतने वाली भारोत्तोलक मीराबाई चानू से प्रधानमंत्री ने बातचीत में पोडियम पर उनके भावुक होने के बारे में पूछा। बातचीत के दौरान उन्होंने मीराबाई को लड्डू भी खिलाया।

मीराबाई ने कहा कि यह उन भावनाओं को बाहर निकालने का पल था जिन्हें वह पिछले चार वर्षों से अपने अंदर दबाए हुए थीं।

मोदी ने कहा, ‘‘इतने आंसू टपक रहे थे।’’

भावुक लेकिन मुस्कुराती हुई मीराबाई ने जवाब दिया, ‘‘मैं उस क्षण बहुत खुश और भावुक थी। मैं इसलिए रो रही थी क्योंकि पेरिस ओलंपिक में मैं एक किलोग्राम से पदक से चूक गई थी। पिछले चार वर्षों में मैंने बहुत कुछ झेला है। मैं चोटों और कुछ पारिवारिक समस्याओं से भी जूझ रही थी।’’

उन्होंने अपनी चोटोंं और पारिवारिक समस्याओं के बारे में विस्तार से बताए बिना कहा, ‘‘कई सारी बातें थीं। ये चार साल मेरे लिए बहुत कठिन रहे। इसलिए जब मैं पोडियम पर खड़ी हुई और हमारा ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान बजा, तो मैं आंसू नहीं रोक पाई।’’

पुरुषों के 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज नरेन्द्र बेरवाल ने 2015 के वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में एक पाकिस्तानी मुक्केबाज को हराने के बाद उससे मिली एक मजेदार प्रतिक्रिया के बारे में मोदी को बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स 2015 के दौरान मेरा पाकिस्तान के एक मुक्केबाज से मुकाबला था। मैंने उसमें जीत हासिल की लेकिन इसके बाद जब उपचार के लिए हम दोनों मेडिकल रूम में थे तो उसने मुझसे कहा, ‘भाईजान, आपका नाम नरेन्द्र है, आपके कोच का नाम नरेन्द्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्र है। मुझे नरेन्द्र नाम से नफ़रत हो गई है।’’

इस पर मोदी हंस पड़े।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें प्रेरणास्रोत बताया।

मोदी ने कहा, ‘‘मैं पिछले 12-13 वर्षों से इस घर में हूं और अगर कोई एक ऐसा वर्ग है जिससे मैं यहां नियमित रूप से मिला हूं, तो वह खिलाड़ी हैं। क्योंकि आप भारत के लिए पदक जीतने की कोशिश करते हैं और नई ऊंचाइयां छूने की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों से कहीं अधिक आपके पदक लोगों को प्रेरित करते हैं।’’

मोदी ने मुक्केबाज जादुमणि सिंह (55 किलोग्राम) की भी तारीफ की, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान 26 जुलाई को पाकिस्तान के मुक्केबाज को हराया था। 26 जुलाई को 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की विजय की याद में विजय दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

मोदी ने भारतीय सेना में सेवारत जादुमणि से कहा, ‘‘भारतीय सशस्त्र बलों को अपना पदक समर्पित करके आपने पहले से ही गौरवशाली क्षण में और गौरव जोड़ दिया है। आपने उसे हराया जिसे हारना चाहिए था।’’

भाषा

पंत

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