राणा ने मनु को अनुशासन और सफलता का मंत्र सिखाया : पिता
राणा ने मनु को अनुशासन और सफलता का मंत्र सिखाया : पिता
… सुमन रे …
नयी दिल्ली 14 जून (भाषा) दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर के पिता राम किशन ने जसपाल राणा को याद करते हुए कहा कि इस दिवंगत कोच ने उनकी बेटी के जीवन में अनुशासन, कड़ी मेहनत और सफलता हासिल करने की सोच विकसित की जिसने उसे चैंपियन खिलाड़ी बनने में मदद की। दिग्गज निशानेबाज राणा का 49 वर्ष की उम्र में हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। भारत के महानतम पिस्टल निशानेबाजों में शामिल राणा ने कोच के रूप में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की और पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के ऐतिहासिक दो कांस्य पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई। किशन ने पीटीआई से कहा, ‘‘मनु के निशानेबाजी करियर में जसपाल राणा का सबसे बड़ा योगदान अनुशासन, एकाग्रता, कड़ी मेहनत और परिणाम हासिल करने की मानसिकता विकसित करना था। वह बेहतरीन कोच थे। उनकी ट्रेनिंग का मनु को बहुत लाभ मिला। उनका इस तरह दुनिया से चले जाना बहुत बड़ी त्रासदी है। हम बेहद दुखी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी चले जाएंगे। वह मनु से हमेशा कहते थे कि मेहनत करो और खुद पर भरोसा रखो। आत्मविश्वास को बनाये रखो। तुम्हारे अंदर लड़ने का जज्बा है, तुम कर सकती हो और जरूर करोगी। वह सख्त स्वभाव के थे, लेकिन दिल के बहुत अच्छे इंसान थे। बाहर से कठोर और अंदर से बेहद नरम। वह महान निशानेबाज होने के साथ-साथ परिणाम देने वाले कोच भी थे।’’ किशन ने कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि वह काफी सख्त थे। वह अक्सर डांटते रहते थे और छोटी-छोटी बातों पर नाराज भी हो जाते थे। अगर उनकी बात नहीं मानी जाती तो उन्हें गुस्सा आ जाता था। लेकिन मनु को भी अनुशासित जीवन पसंद था और यही बात उन्हें उनके करीब ले आई।’’ मनु की वर्तमान मानसिक स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “वह अभी बात करने की स्थिति में नहीं है। जब भी मैं फोन करता हूं, वह सिर्फ इतना कहती है कि ‘पापा मैं बाद में बात करूंगी’। यह व्यक्तिगत क्षति है और इससे उबरने में समय लगता है। पूरी तरह संभलने के बाद ही वह तय करेगी कि उसे क्या करना है।” राणा की सख्त प्रशिक्षण शैली को याद करते हुए राम किशन ने कहा, “कई बार मनु को सुबह छह बजे निशानेबाजी परिसर पहुंचने के लिए कहा जाता था। परिसर अगर बंद होता था और गार्डों ने ताला लगा रखा होता था, तो हम उनसे खुलवाते थे। अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं होता था।’’ किशन ने वर्ष 2021 में मनु और राणा के बीच हुए मतभेद की वजह का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, ‘‘तोक्यो ओलंपिक से दो-तीन महीने पहले जसपाल ने अचानक कहा कि वह मनु को कोचिंग नहीं देंगे। कुछ मुद्दे चल रहे थे। मनु ने दो ओलंपिक स्पर्धाओं (10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल) के लिए क्वालीफाई किया था। वह दोनों स्पर्धाओं में खेलना चाहती थी, जबकि जसपाल चाहते थे कि वह 25 मीटर स्पर्धा छोड़ दे। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसका मनु पर काफी नकारात्मक असर पड़ा। तोक्यो ओलंपिक के बाद उसके प्रदर्शन में भी गिरावट आई। वह इस दुविधा में थी कि निशानेबाजी जारी रखे या नहीं। उस समय वह किशोरावस्था में थी और डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस अधिकारी बनने के बारे में भी सोच रही थी।’’ राम किशन के अनुसार, पेरिस ओलंपिक से पहले दोनों के बीच फिर से तालमेल बना। उन्होंने कहा, ‘‘जसपाल राणा ने स्थिति को समझा और कहा कि हम साथ मिलकर काम करेंगे। पेरिस में मनु ने दोनों स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। राणा ने उसका पूरा समर्थन किया और उसका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद उसके प्रदर्शन में लगातार सुधार आया।” उन्होंने कहा, “मनु ने यह समझा कि अगर जीवन में अनुशासन हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यही सीख जसपाल राणा उसे देकर गए हैं।’’ भाषा आनन्द पंतपंत

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