Amavasya Kab Hai: इस बार की अमावस्या साधारण नहीं! एक साथ बन रहे 4 महाशुभ योग, क्या खुल जाएगा भाग्य का दरवाजा?
Amavasya Kab Hai: हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है। जून महीने की अमावस्या को लेकर लोगों में भ्रम है। कुछ लोग इसे 14 जून मान रहे हैं। लेकिन पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या 15 जून सोमवार को मनाई जाएगी। इसी दिन इसका धार्मिक महत्व और पूजा का विशेष समय रहेगा।
(Amavasya Kab Hai/ Image Credit: Pixabay)
- सोमवती अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।
- अमावस्या तिथि 14 जून दोपहर से शुरू होकर 15 जून सुबह तक रहेगी।
- इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।
Amavasya Kab Hai: जून महीने की अमावस्या को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम बना हुआ है। कई लोग इसे 14 जून मान रहे हैं। लेकिन पंचांग के अनुसार सही तिथि सोमवार 15 जून को है। दरअसल, अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12:20 बजे शुरू होकर 15 जून की सुबह 8:24 बजे तक रहेगी। हिंदू परंपरा में सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उसी के आधार पर व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसलिए इस बार सोमवती अमावस्या 15 जून को ही मानी जाएगी।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व (Religious significance of Somvati Amavasya)
अमावस्या हर महीने आती है लेकिन जब यह सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करते हैं और कई महिलाएं व्रत भी रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।
पूजा और परंपराएं (Worship and Traditions)
इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करते हैं। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। कई भक्त पीपल के पेड़ की पूजा भी करते हैं क्योंकि इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। इसके अलावा पितरों के लिए तर्पण करने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है। जिससे पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना की जाती है।
स्नान, दान और धार्मिक महत्व (Snan, Charity and Religious Significance)
धार्मिक ग्रंथों में सोमवती अमावस्या को अत्यंत शुभ बताया गया है। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना, दान-पुण्य करना और पितरों का तर्पण करना बहुत फलदायी माना जाता है। पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु और शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
दुर्लभ संयोग का बनना (Occurrence of Rare Coincidence)
इस बार 15 जून 2026 को एक बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन सोमवती अमावस्या, मिथुन संक्रांति और ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का अंतिम दिन एक साथ पड़ रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार ऐसा संयोग बहुत कम देखने को मिलता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह धार्मिक दृष्टि से एक विशेष दिन बन जाता है।
शुभ समय और ग्रह परिवर्तन (Auspicious Times and Planetary Transits)
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 15 जून की सुबह 8:23 बजे तक अमावस्या और संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। इस दौरान स्नान, दान, जप और पूजा करना बहुत लाभकारी माना जाता है। इसी दिन दोपहर करीब 12:49 बजे सूर्य वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है। इस कारण यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है।
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