मां के खेलने के तीन दशक बाद नीदरलैंड में भारत के लिए विश्व कप खेलेगा बेटा
मां के खेलने के तीन दशक बाद नीदरलैंड में भारत के लिए विश्व कप खेलेगा बेटा
(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) प्रीतम रानी सिवाच ने नीदरलैंड में 1998 में विश्व कप खेला था तब यशदीप सिवाच का जन्म भी नहीं हुआ था। विधि का विधान है कि करीब तीन दशक बाद वह उसी देश में, उसी टूर्नामेंट में भारत के लिये पदार्पण करने जा रहे हैं ।
भारतीय हॉकी में यह श्रेय हासिल करने वाली मां . बेटे की यह पहली जोड़ी है ।
नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले विश्व कप में यशदीप भारतीय टीम का हिस्सा हैं और उनके इस टूर्नामेंट से काफी जज्बात जुड़े हैं ।
मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल 2002 की स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य रही भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान प्रीतम रानी सिवाच के बेटे ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘जब मुझे विश्व कप टीम में चयन का पता चला तो सबसे पहले मैने अपनी मां को बताया । वह काफी भावुक थी क्योंकि उन्होंने भी 1998 में नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में विश्व कप खेला था ।’’
26 वर्ष के इस डिफेंडर ने कहा ,‘‘ मेरे लिये विश्व कप में उसी देश में भारत के लिये खेलना जहां मेरी मां भी खेल चुकी है, बहुत खास है ।’’
भारतीय महिला हॉकी टीम यूट्रेक्ट विश्व कप में बारहवें और आखिरी स्थान पर रही थी लेकिन प्रीतम ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच में दो गोल दागे थे ।
कभी तैराकी के शौकीन रहे यशदीप बचपन से अपनी मां का वह एलबम देखते आये हैं जिसमें उनकी एक्शन पिक्चर, टूर्नामेंट के फोटो और टीम फोटो हैं और शायद वहीं से उनके भीतर भी हॉकी स्टिक थामने का शौक पैदा हुआ । माता पिता के साथ राष्ट्रीय चैम्पियनशिप और दिल्ली में 2010 विश्व कप उन्होंने देखा था ।
यशदीप ने कहा ,‘‘ मम्मी ने मुझसे काफी अनुभव साझा किये हैं । उनके पास पूरी एलबम है जिसमें एक्शन पिक्चर, टूर्नामेंटों के फोटो , साथी खिलाड़ियों के फोटो हैं । मैं बचपन से देखता आ रहा हूं । उनकी टीम से बात होती रहती है और मुझे सबसे मार्गदर्शन मिलता है ।’’
बचपन में मां को अक्सर राष्ट्रीय शिविरों और टूर्नामेंटों में देखने वाले यशदीप को उनकी कड़ी मेहनत और बलिदानों का महत्व राष्ट्रीय शिविर में आने के बाद अधिक समझ आने लगा ।
उन्होंने कहा ,‘‘ जब मैं छोटा था तब मम्मी लंबे समय राष्ट्रीय शिविर में रहती थी । उस समय वीडियो कॉल वगैरह भी नहीं होता था । मेरे पापा और दादा दादी ने पूरा ध्यान रखा लेकिन मां की जब भी याद आती तो पटियाला या आसपास शिविर लगते तो मेरे पापा वीकेंड पर मुझे ले जाते।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ टीम बाहर खेलने जाती तो पापा हवाई अड्डे पर ले जाते । मुझे याद है कि मम्मी को ओलंपिक क्वालीफायर टूर के लिये जाना था तो मुझे होटल लेकर गए और एक दिन मैं अपनी मां के साथ रहा।’’
2022 में भारत के लिये पदार्पण करने वाले इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘तब तो समझ नहीं आया लेकिन अब पता चलता है कि उन्होंने कितनी मेहनत की और कुर्बानियां दी । टीम में आना और अच्छा खेलना कितना मुश्किल है । इतने साल लगातार खेलने के लिये अपनी फिटनेस (मानसिक और शारीरिक) और खेल का ध्यान रखना पड़ता है ।’
उन्होंने कहा ,‘‘रिटायर होने के बाद भी वह कोचिंग के जरिये हॉकी से जुड़ी हैं और अभी भी नीदरलैंड में मास्टर्स विश्व कप खेल रही हैं । मैने बचपन से देखा है कि कैसे मेरी बहन के पैदा होने के बाद भी वजन कम करके वापसी की थी ।’’
हॉकी यशदीप के खून में हैं चूंकि उनके पिता कुलदीप भी हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं और अब मशहूर कोच हैं जो हरियाणा में अपनी पत्नी के साथ प्रीतम सिवाच अकादमी चलाते हैं । चोट के कारण उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना हालांकि अधूरा रह गया। जूनियर राष्ट्रीय टीम में खेल चुकी बहन कनिका सीनियर टीम में पदार्पण की दहलीज पर है ।
सिवाच परिवार के लिये यह विश्व कप काफी मायने रखता है और पोडियम पर रहकर अपनी मां और पिता का अधूरा सपना यशदीप पूरा करना चाहते हैं ।
उन्होंने कहा ,‘‘ सिवाच परिवार के लिये यह विश्व कप बहुत खास है । मैं अपने माता पिता का सपना पूरा करना चाहता हूं और अपनी बहन के लिये प्रेरणा बनना चाहता हूं ।’’
प्रीतम दिग्गज मिडफील्डर रही हैं और कनिका फॉरवर्ड खेलती हैं लेकिन यशदीप को गोल करने से ज्यादा बचाने में मजा आता है ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मेरी मां और बहन के नाम ज्यादा गोल होंगे लेकिन मुझे फुटबॉल फैन होने के कारण गोल बचाने और गोल में सहायता करने में ज्यादा मजा आता है । इसके अलावा मेरी ट्रेनिंग बचपन में पापा ने कराई जो डिफेंडर थे ।’’
आस्ट्रेलिया में छह महीने क्लब हॉकी खेल चुके यशदीप ने कहा कि वह विश्व कप को लेकर बिल्कुल दबाव में नहीं हैं और कोच तथा सीनियर खिलाड़ियों ने उनका मनोबल काफी बढाया है ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मुख्य कोच क्रेग फुल्टन हमेशा कहते हैं कि अपने खेल का आनंद लेकर खेलो । भुवनेश्वर में प्रो लीग के दौरान उन्होंने कहा था ‘जस्ट बी यू’ । कोई भी बड़ा खिलाड़ी सामने हो ,डरना नहीं है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘टीम में कप्तान हरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, जरमनप्रीत जैसे अनुभवी डिफेंडर हैं जिन्हें मैं जूनियर स्तर से देख रहा हूं । ये सब काफी टिप्स देते रहते हैं और गलती होने पर समझाते हैं । हरमन पाजी से मैदान के भीतर और बाहर कोई भी सवाल पूछ सकते हैं ।’’
भुवनेश्वर में जूनियर विश्व कप 2021 में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम के सदस्य रहे यशदीप ने स्वीकार किया कि सीनियर स्तर पर खेलने का दबाव अलग है ।
उन्होंने कहा ,‘‘जूनियर टीमों में सभी नये होते हैं लेकिन सीनियर स्तर पर ओलंपियन, विश्व कप विजेता, अनुभवी खिलाड़ियों का सामना करना है ।इसमें एक ईकाई के तौर पर अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है ।’’
अपनी मां से मिली विरासत पर उन्हें गर्व है लेकिन उनकी ख्वाहिश है कि भविष्य में सिवाच परिवार की पहचान उनके प्रदर्शन से हो ।
उन्होंने कहा,‘‘ मेरी मां से जो भी विरासत में मिला है , उस पर मुझे गर्व है लेकिन मैं चाहता हूं कि भविष्य में लोग मेरी मां को मेरी वजह से पहचाने । लोग बोले कि यह यशदीप सिवाच की मां है ।’’
भाषा
मोना सुधीर
सुधीर

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