स्पेन खिताब का दावेदार, इंग्लैंड-अर्जेंटीना सेमीफाइनल को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी

स्पेन खिताब का दावेदार, इंग्लैंड-अर्जेंटीना सेमीफाइनल को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी

स्पेन खिताब का दावेदार, इंग्लैंड-अर्जेंटीना सेमीफाइनल को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी
Modified Date: July 15, 2026 / 03:33 pm IST
Published Date: July 15, 2026 3:33 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के अनुसार स्पेन अपने अनुशासित खेल, मजबूत रक्षण और मैच के दौरान परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की काबिलियत की बदौलत फीफा विश्व कप का सबसे प्रबल दावेदार है लेकिन बुधवार को इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाले सेमीफाइनल को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है।

स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इस जीत के साथ उसने टूर्नामेंट में अपना शानदार रक्षात्मक रिकॉर्ड भी कायम रखा। सात मैच में स्पेन ने महज एक गोल गंवाया है जबकि छह में क्लीन शीट रही।

फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एमबाप्पे और उस्मान डेम्बेले पूरे मैच में असर नहीं छोड़ सके। स्पेन ने मजबूत रक्षण और शानदार मिडफील्ड खेल के दम पर मैच पर नियंत्रण बनाए रखा।

पूर्व भारतीय कप्तान और ध्यानचंद पुरस्कार विजेता शब्बीर अली ने कहा कि स्पेन का मैच की शुरुआत से ही फ्रांस की लय बिगाड़ना उसकी जीत में अहम रहा।

उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘स्पेन ने फ्रांस के मिडफील्ड को डेम्बेले और एमबाप्पे के लिए मौके बनाने ही नहीं दिए। जैसे ही स्पेन ने मिडफील्ड पर नियंत्रण किया, पूरे मैच में वही हावी रहा। ’’

वह स्पेन की रणनीति को लेकर लचीलेपन से भी काफी प्रभावित नजर आए। पूर्व स्ट्राइकर ने कहा, ‘‘सबसे ज्यादा यह अच्छा लगा कि उन्होंने एक ही तरह की फुटबॉल नहीं खेली। कभी छोटे पास, कभी लंबे पास, कभी विंग से और कभी बीच से आक्रमण किया। फ्रांस उनकी रणनीति को समझ ही नहीं पाया। ’’

अली ने कहा कि स्पेन की सफलता किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरी टीम के शानदर प्रदर्शन का परिणाम है।

उन्होंने कहा, ‘‘गोलकीपर का काम गोल बचाना होता है और उनाई सिमोन ने यह जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाई। लेकिन स्पेन के एकजुट रक्षण के कारण फ्रांस गोल करने के मौके ही नहीं बना सका। ’’

पूर्व भारतीय महिला कप्तान अदिति चौहान ने भी माना कि स्पेन की मजबूत रक्षात्मक क्षमता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने कहा, ‘‘स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया है। पाउ कुबार्सी शानदार रहे, मार्क कुकुरेला ने अपना काम किया, रोड्री और पेड्रो पोरो ने भी बड़ा योगदान दिया। मजबूत रक्षण ही टीम को चैंपियन बनाता है और स्पेन ने इसे साबित किया है। ’’

पूर्व भारतीय मिडफील्डर सैयद रहीम नबी ने कहा कि स्पेन की मेहनत उसे फाइनल तक ले गई। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने हर गेंद के लिए संघर्ष किया और एमबाप्पे को खेल में आने ही नहीं दिया। स्पेन के मिडफील्ड ने पूरे मैच पर नियंत्रण रखा और उसकी पूरी टीम इस जीत की हकदार है। ’’

अब सबकी नजरें इंग्लैंड और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल पर हैं।

अली का मानना है कि लियोनल मेस्सी के बावजूद इंग्लैंड अपने अनुशासित प्रदर्शन के कारण मजबूत दावेदार है।

उन्होंने कहा, ‘‘इंग्लैंड ने बेहतरीन रक्षण किया है और जूड बेलिंगहम शानदार फॉर्म में हैं। हैरी केन हमेशा खतरा बने रहते हैं और उनके पास बेंच पर भी अच्छे खिलाड़ी हैं। अगर वे मेस्सी तक गेंद पहुंचने से रोक दें तो उनके पास जीत का अच्छा मौका होगा। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मेस्सी ही नहीं हैं। जूलियन अल्वारेज और एंजो फर्नांडीज जैसे खिलाड़ी भी हैं इसलिए इंग्लैंड को सिर्फ एक खिलाड़ी को ही नहीं बल्कि पूरी अर्जेंटीना टीम को रोकना होगा। ’’

वहीं अदिति का मानना है कि अर्जेंटीना फाइनल तक पहुंच सकता है। वहीं नबी का कहना है कि इंग्लैंड की टीम अर्जेंटीना की अपेक्षाकृत कमजोर रक्षापंक्ति की कड़ी परीक्षा लेगी लेकिन मेस्सी का जादू किसी भी समय मैच का रुख बदल सकता है।

भाषा नमिता मोना

मोना


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