राष्ट्रीय इंडोर चैंपियनशिप का शुरुआती सत्र खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए सीखने शानदार मौका

राष्ट्रीय इंडोर चैंपियनशिप का शुरुआती सत्र खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए सीखने शानदार मौका

राष्ट्रीय इंडोर चैंपियनशिप का शुरुआती सत्र खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए सीखने शानदार मौका
Modified Date: March 24, 2026 / 03:35 pm IST
Published Date: March 24, 2026 3:35 pm IST

… फिलेम दीपक सिंह …

भुवनेश्वर, 24 मार्च (भाषा) देश में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप उद्घाटन सत्र के शुरुआती दिन खिलाड़ियों और अधिकारियों को नये माहौल के अनुरूप खुद को ढालना पड़ा जिसमें गोला फेंक (शॉटपुट) के युवा खिलाड़ी ओमकार प्रसाद नंदा ने पुराने घिसे हुए जूतों का सहारा लिया जबकि धाविका सी प्रियंका ने घुमावदार ट्रैक से सामंजस्य बिठाने के लिए अपने अनुभव का इस्तेमाल किया। ओडिशा के नंदा उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें इस अत्याधुनिक इंडोर स्टेडियम में पहले से अभ्यास का मौका मिला था। वह इसी परिसर के आवासीय हॉस्टल में रहते हैं। लगभग दो सप्ताह से यहां अभ्यास कर रहे नंदा ने लकड़ी के बने ‘थ्रोइंग सर्कल’ पर फिसलन की आशंका को लेकर सतर्कता बरती। अंडर-20 वर्ग में 17.77 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाले नंदा ने कहा, “आउटडोर स्पर्धाओं में ‘थ्रोइंग सर्कल’ सीमेंट का होता है, जिससे जूतों को पकड़ मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है लेकिन इंडोर में लकड़ी का सर्कल थोड़ा फिसलन भरा होता है, इसलिए चोट से बचने के लिए सावधानी जरूरी है।” उन्होंने बताया कि रोटेशन (थ्रो से पहले की प्रक्रिया) के दौरान फिसलन का खतरा रहता है, लेकिन शुरुआती संतुलन सही रहने पर बेहतर दूरी हासिल की जा सकती है। इस युवा खिलाड़ी ने कहा, “मैंने आज फिसलन का सामना नहीं किया, शायद इसलिए क्योंकि मैं यहां अभ्यास का आदी हो चुका हूं।” नंदा ने यह भी बताया कि उन्होंने करीब ढाई साल पुराने जूते पहने ताकि घिसे हुए जूतों से बेहतर पकड़ मिल सके। इंडोर और आउटडोर स्पर्धाओं के अंतर पर नंदा ने कहा, ‘‘तकनीक समान रहती है, लेकिन आउटडोर में हवा का सहारा मिलता है, जो इंडोर में नहीं होता।’’ उनका आउटडोर व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 18.23 मीटर है। कर्नाटक की प्रियंका ने नौ मिनट 42.05 सेकंड का समय निकालते हुए सीनियर महिला 3000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने बताया कि 200 मीटर के घुमावदार ट्रैक पर दौड़ना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बेंगलुरु में ऐसे ट्रैक पर पहले के अभ्यास का अनुभव उनके काम आया। प्रियंका ने कहा, “हम आमतौर पर 400 मीटर ट्रैक पर दौड़ते हैं, इसलिए 200 मीटर ट्रैक ज्यादा घुमावदार होता है और उसके अनुरूप ढलना पड़ता है। मध्य और लंबी दूरी की दौड़ में धैर्य, रणनीति और अंतिम 120-150 मीटर में तेजी अहम होती है।” भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के लिए भी यह पहला इंडोर आयोजन एक सीखने का अनुभव साबित हो रहा है। महासंघ के कोषाध्यक्ष और तकनीकी समिति सदस्य स्टेनली जोन्स ने कहा कि नियम लगभग समान हैं, लेकिन 200 मीटर का ढलानयुक्त और अधिक घुमावदार ट्रैक मुख्य अंतर है। उन्होंने कहा कि इंडोर स्पर्धाओं में हवा, तापमान और मौसम का प्रभाव नहीं होता, जिससे प्रतियोगिता अधिक नियंत्रित और स्थिर वातावरण में होती है। साथ ही बारिश का असर भी नहीं पड़ता, जो एक बड़ा सकारात्मक पहलू है। हालांकि, सीमित स्थान के कारण एक साथ कई स्पर्धाएं आयोजित करना संभव नहीं होता। इंडोर शॉटपुट में मापने की प्रक्रिया भी अलग है। आउटडोर में गेंद के गिरने का निशान स्पष्ट दिखता है, लेकिन इंडोर में फर्श की सुरक्षा के लिए स्पंज या फोम मैट का उपयोग होता है, जिस पर स्पष्ट निशान नहीं बनता। जोन्स ने बताया, “गेंद गिरने पर मैट पर कुछ सेकंड के लिए हल्का दबाव बनता है, उसी के आधार पर अधिकारी माप का बिंदु तय करते हैं। नियंत्रित तापमान के कारण मैट पर नमी भी रहती है, जिससे यह निशान थोड़ी देर तक बना रहता है।” उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी खिलाड़ी शॉटपुट पर पकड़ बनाने के लिए के लिए सफेद पाउडर का उपयोग करते हैं, जिससे गेंद के गिरने पर निशान स्पष्ट हो जाता है। भाषा आनन्द मोनामोना


लेखक के बारे में