आप युद्धपोतों से घिरे रहते हुए बिना चिंता के नहीं खेल सकते, जुर्माने का डर नहीं: हम्पी
आप युद्धपोतों से घिरे रहते हुए बिना चिंता के नहीं खेल सकते, जुर्माने का डर नहीं: हम्पी
नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) भारतीय शतरंज की दिग्गज खिलाड़ी कोनेरू हम्पी ने इस महीने के अंत में साइप्रस में होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट से हटने के अपने फैसले पर अडिग रहते हुए कहा कि युद्धपोतों से घिरे रहते हुए शांतिपूर्वक खेलना संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जुर्माने का कोई डर नहीं है और वह आर्थिक लाभ के लिए नहीं खेल रही हैं।
दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन और 28 मार्च से साइप्रस में होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भाग लेने वाली चार भारतीयों में से एक हम्पी ने खाड़ी युद्ध के दौरान सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया, क्योंकि मेजबान साइप्रस इस अशांत क्षेत्र के निकट स्थित है। उनकी जगह यूक्रेन की ग्रैंडमास्टर अन्ना मुजचुक ने ली है।
हम्पी ने सोमवार ‘पीटीआई’ को कहा, ‘‘आप युद्धपोतों से घिरे होने पर नहीं खेल सकते। अगर मुझ जैसी विदेशी महिला को इतनी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता के लिए यात्रा करनी पड़े, तो मैं बिना किसी डर और एकाग्रता से कैसे खेल सकती हूं?’’
हम्पी 16 प्रतिभागियों (ओपन वर्ग में आठ और महिला वर्ग में आठ) में से नाम वापस लेने वाली अकेली खिलाड़ी हैं। उनके इस कदम से उन पर भारी आर्थिक जुर्माना लगने की संभावना है, लेकिन इस खिलाड़ी ने कहा कि उन्हें इसका डर नहीं है।
हम्पी ने कहा, ‘‘देखिए, यही तो मसला है। इसीलिए वे (अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ यानी फिडे) इस तरह का जुर्माना रखते हैं, ताकि खिलाड़ी तथ्य न बोलें। मुझे इसका डर नहीं है। मैं सिर्फ पैसे या आर्थिक लाभ के लिए नहीं खेल रही हूं। मुझे बस खेल में आनंद आता है।’’
हम्पी ने कहा कि उन्होंने इस प्रतियोगिता के लिए तीन महीने तक कड़ी तैयारी की थी। इस तैयारी के कारण उन्हें अपनी बेटी के साथ अच्छे से समय बिताने का मौका नहीं मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन महीनों से मैं सिर्फ इसी टूर्नामेंट के लिए मेहनत कर रही हूं। मैंने अपनी बेटी के साथ भी अच्छा समय नहीं बिताया है। मेरे जैसी खिलाड़ी अगर टूर्नामेंट से हट रही है, तो इतने महत्वपूर्ण टूर्नामेंट को छोड़ना मेरे लिए अच्छा नहीं है। मुझे बहुत कुछ खोना पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि इस आयोजन को एक महीने के लिए स्थगित किया जा सकता था या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता था, जिससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
पिछले साल महिला विश्व कप में उपविजेता रहने के बाद कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने वाली इस दिग्गज खिलाड़ी ने कहा , ‘‘वे टूर्नामेंट को दुनिया में कहीं भी आयोजित कर सकते थे। अगर वे साइप्रस में ही इसे आयोजित करने पर अड़े थे, तो वे स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर सकते थे।’’
इस संबंध में फिडे के उपाध्यक्ष और दिग्गज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद से हुई बातचीत के बारे में पूछे जाने पर हम्पी ने कहा कि बातचीत हुई थी, लेकिन उन्होंने विवरण नहीं बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘बेशक, कुछ बातें हुईं, लेकिन मैं किसी और के बारे में बात नहीं करना चाहती।’’
हम्पी ने कहा कि उनके इस फैसले में उनके परिवार का पूरा समर्थन है।
उन्होंने कहा, ‘‘साइप्रस, लेबनान और इजराइल के बहुत करीब है। इस द्वीप पर ब्रिटेन के एक अड्डे पर ड्रोन हमले की पुष्टि भी हुई है। साइप्रस के राष्ट्रपति ने खुद हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हुई चर्चा में द्वीप पर ब्रिटेन के अड्डे को लेकर चिंता व्यक्त की थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश के राष्ट्रपति अगर खुद यूरोपीय संघ में चिंता जता रहे हैं, तो मुझ जैसी विदेशी खिलाड़ी और महिला के लिए द्वीप की यात्रा को लेकर आशंकित होना क्या गलत है?’’
हम्पी ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि 15 खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और उन्होंने नाम वापस ले लिया है, इसका मतलब यह नहीं है कि आयोजकों का इस प्रतियोगिता को जारी रखना सही है।
उन्होंने कहा, ‘‘बेशक, लोग सवाल उठा सकते हैं, जैसे कि 15 खिलाड़ी खेलने के लिए तैयार हैं और सिर्फ आप ही इस ओर इशारा कर रही हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर सभी खेल रहे हैं, तो आयोजक जो कर रहे हैं, वह सही है। हो सकता है कि आयोजन बिना किसी बाधा के हो जाए, कोई नहीं जानता। लेकिन बात यह है कि ऐसी परिस्थितियों में इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी… जैसे कि यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ब्रिटेन ने ‘लेवल 3 (सलाह)’ जारी की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘‘लेवल 3’ सलाह जम्मू-कश्मीर के लिए भी लागू है। वहां बेहद खूबसूरत रिजॉर्ट है, लेकिन क्या आप वहां टूर्नामेंट करा सकते हैं?’’
हम्पी ने कहा कि उन्होंने ओपन वर्ग में साथी भारतीय खिलाड़ी आर प्रज्ञानानंदा और महिला वर्ग में आर वैशाली तथा दिव्या देशमुख से बात नहीं की है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी और के बारे में बात नहीं करना चाहती। यह उनकी इच्छा है। हर किसी के अपने हित और चिंताएं होती हैं। इसलिए, मैं किसी और के बारे में बात नहीं करना चाहती। यह मेरी पसंद है और यह मेरी राय है, और मुझे यह बिल्कुल सही लगता है।’’
भाषा आनन्द
आनन्द

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