छत्तीसगढ़ का ऐसा गांव जिसने आज़ादी के बाद पहली बार देखा कलेक्टर ?

छत्तीसगढ़ का ऐसा गांव जिसने आज़ादी के बाद पहली बार देखा कलेक्टर ?

छत्तीसगढ़ का ऐसा गांव जिसने आज़ादी के बाद पहली बार  देखा कलेक्टर ?
Modified Date: November 29, 2022 / 09:01 pm IST
Published Date: January 22, 2018 7:00 am IST

छत्तीसगढ़ का एक गांव जो सिर्फ जिला मुख्यालय से करीब एक सौ चालीस किलोमीटर दूर है उसके लिए कल का दिन कभी न भूलने वाला था  आजादी के बाद से यह पहला मौक़ा था जबकि कोई कलेक्टर जटिल रास्तों को तय करते हुए, मध्यप्रदेश की सीमा के भीतर चार किलोमीटर चल कर छत्तीसगढ के आनंदपुर पंचायत के इस आश्रित गाँव पहुँचा हो, यह गाँव है कछुआखोह।जैसा नाम है वैसा ही प्राकृतिक परिवेश है इस गाँव का, 90 की कुल आबादी वाले गाँव में पूरा जीवन ही जटिलताओं का दूसरा नाम है।इलाज की जरुरत हो या दिगर किसी और आपातकालीन व्यवस्था की तो मध्यप्रदेश का बैढन और सिंगरोली ही राहत का दूसरा नाम है, गाँव में प्रायमरी स्कुल है, जहाँ फ़िलहाल दाख़िल बच्चो की संख्या चार है।

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हालाँकि कुछ बच्चियाँ और बच्चे ऐसे भी मिले जो जिले के ही आश्रमों में रह कर नवमी से बारहवीं तक की पढ़ाई कर पाए है, पर इनकी संख्या भी बहुत ज्यादा नही है।इस गाँव की धरती ने कभी जिले के कलेक्टर को नहीं देखा था। लेकिन कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा ने इस बार ठान लिया था कि रास्ता जितना भी जटिल क्यों न हो वे वहां जायेंगे जरूर। कलेक्टर  दुग्गा केवल वहाँ पहुँचे ही नही बल्कि साथ बैठे, तकलीफ़ों को जाना समझा, और करीब डेढ घंटे में गांव को पूरा घुमा भी.

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कलेक्टर नरेंद्र दुग्गा ने कछुआखोह को चार सोलर पंप तत्काल मंजुर किए ताकि बारहोमासी पानी से लबरेज़ नाले से खेती के लिए पानी मिल सके, वहीं सोलर से रौशन घरों में फिर से जाँच कर बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कछुआखोह को पुलिया सह स्टॉपडेम की भी सौग़ात मिली।

वेब टीम IBC24


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