छग में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किया गया, ऑडिटोरियम के नाम पर बड़ा घोटाला!
छग में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किया गया, ऑडिटोरियम के नाम पर बड़ा घोटाला!
सूचना के अधिकार के द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार जनता काँग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रवक्ता व मीडिया समन्वयक संजीव अग्रवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पं. दीनदयाल उपाध्याय अॉडिटोरियम के नाम पर हुए बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। संजीव अग्रवाल ने तमाम मीडिया बंधुओं को दस्तावेज सौंप कर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किये गये एक बड़े घोटाले की जानकारी दी है जिसमें उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री राजेश मुणत के विधानसभा क्षेत्र में साइंस कॉलेज रायपुर में निर्मित पं दीनदयाल उपाध्याय अॉडिटोरियम के नाम पर उसके निर्माण से लेकर उद्घाटन तक करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई है जिसका विवरण निम्नलिखित है।
ठेकेदार का नाम – M/S श्रीजी कृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड, रायपुर जो कि गुजरात की कंपनी है।
कार्य का नाम – साइंस कॉलेज, रायपुर में अॉडिटोरियम बिल्डिंग का निर्माण कार्य
कार्य की राशि – Rs. 25,40,15367 जो कि 12 % एबव है। कुल राशि 28,44,80, 000
जो बिल जमा किया गया है उसकी राशि है 32,36,14,898 व अन्य 8,77,15,403
कार्य का अनुबंध की तिथि – 18.09.2015
कार्य का पूर्ण होने की तिथि – 10.10.2017
उद्घाटन तिथि – 15.10.2017
उद्घाटन समारोह का खर्च – फूलों पर खर्च – 2,50,000, फोटो और विडियो शूटिंग पर खर्च – 62,000, 2700 ब्रोशर पर खर्च – 61,700 और 5850 आमंत्रण पत्रों पर खर्च – 1,14,075 रुपए
जनता कांग्रेस जे के प्रवक्ता व मीडिया समन्वयक संजीव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पं. दीनदयाल उपाध्याय अॉडिटोरियम के नाम पर हुए बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। pic.twitter.com/gspsnwlLw5
— Renu Nandi (@NandiRenu) March 22, 2018
अब गौर करने वाली बात यह है कि जब समय सीमा के अंदर यह काम पूरा हो गया था तो विभाग द्वारा 12 करोड़ 68 लाख 50 हजार 29 रुपए की अधिक राशि बिना स्वीकृति के ठेकेदार को किस आधार पर दी गई है, यह भी शक के दायरे में आता है जिसकी जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर अॉडिटोरियम के उद्घाटन समारोह में जो खर्च किया गया है उसमें बिना जीएसटी के बिल लिए गए हैं।

इस प्रकरण में पहली ध्यान देने लायक बात यह है कि इस अॉडिटोरियम के निर्माण के लिए जो राशि स्वीकृत की गई है वो कुल राशि का 12 प्रतिशत ज्यादा है जब कि कोई भी टेंडर बिलो जाता है न कि एबव, दूसरी बात यह है जब निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूर्ण कर लिया गया था तो 12 करोड़ रुपये से अधिक की अधिक राशि शासन द्वारा ठेकेदार को बिना किसी स्वीकृति के कैसे दी गई, तीसरी बात उद्घाटन समारोह में हुए अनावश्यक खर्च में लिए गए बिल, बिना जीएसटी के हैं। यही नहीं कार्यक्रम में हुए टेंट, डेकोरेशन और कैटरिंग के खर्च का ब्योरा भी आरटीआई द्वारा नहीं दी गई है। इस प्रकरण में पूरी तरह से करप्शन की बू आ रही है और लगता है कि छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मुणत अपने विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।
जकाँछ प्रवक्ता संजीव अग्रवाल ने मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से इस घोटाले की ऊच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है और कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो न्यायालय के शरण में भी जाएंगे।
web team IBC24

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