उर्मिला भारती… भारिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष… या यूं कहें कि प्राधिकरण की इकलौती कर्मचारी, अधिकारी और अध्यक्ष। महाकौशल के हिस्से की तकरीबन डेढ लाख अति पिछडी जनजाति है भारिया जनजाति। इस जनजाति को समाज की मुख्यधारा में लाने की गरज से 2013 में भारिया विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। उर्मिला भारती को राज्यमंत्री का दर्जा देकर भारिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन श्यामला हिल्स स्थित एक कमरे के अपने दफ्तर में पहुंचने के बाद उन्हें खुद अपनी टेबल, कुर्सी और फाइलों की धूल साफ करनी पड़ती है। दफ्तर में पीने के पानी का इंतजाम नहीं, लिहाजा वे पानी की बोतल घर से लेकर आती हैं। चार साल में प्राधिकरण का बॉयलाज ही तैयार नहीं हुआ, लिहाजा उर्मिला भारती को पता ही नहीं कि उन्हें करना क्या है..?
चार सालों में भारिया विकास प्राधिकरण की कोई बैठक ही नहीं हुई है। उर्मिला भारती हर हफ्ते भोपाल के चक्कर काटती हैं। लेकिन अफसर से लेकर मंत्री तक किसी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
भारिया जैसी अति पिछडी जनजाति के प्रति सरकार का रवैया भी अति पिछडा ही नजर आता है। सरकार आयोगों, प्राधिकरणों का गठन तो कर देती है, लेकिन किसी जाति के विकास के लिए वो कितनी संजीदा है ये उर्मिला भारती के और भारिया विकास प्राधिकाण की अध्यक्ष की हालत देख कर ही समझ में आ रहा है।