भारी बारिश के कारण कोंकण रेल मार्ग पर ट्रेन सेवाएं प्रभावित, करीब छह हजार यात्री फंसे

भारी बारिश के कारण कोंकण रेल मार्ग पर ट्रेन सेवाएं प्रभावित, करीब छह हजार यात्री फंसे

Edited By: , July 22, 2021 / 09:39 AM IST

मुंबई, 22 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले में कोंकण रेल मार्ग पर ट्रेन सेवाओं को बृहस्पतिवार सुबह क्षेत्र में भारी बारिश और एक नदी में उफान के बाद निलंबित करना पड़ा, जिससे करीब छह हजार रेल यात्री फंस गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मार्ग पर व्यवधान के कारण नौ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया, उन्हें गंतव्य से पहले रोका गया है या रद्द कर दिया गया है।

कोंकण रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि ये ट्रेनें अलग-अलग स्टेशनों पर सुरक्षित स्थानों पर हैं और उनके अंदर मौजूद यात्री भी सुरक्षित हैं। उन्हें खाने-पीने का सामान मुहैया कराया जा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि भारी बारिश के कारण रत्नागिरि में चिपलून और कामठे स्टेशन के बीच वशिष्ठ नदी पुल का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।

घाटगे ने कहा, ‘‘ यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस खंड पर ट्रेन सेवाएं अस्थायी तौर पर निलंबित कर दी गई हैं।’’

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कोंकण रेल मार्ग पर 5,500-6,000 यात्री ट्रेनों में फंस गए हैं। कोंकण रेलवे ने बताया कि चिपलून में बाढ़ की स्थिति के कारण नौ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया, उन्हें गंतव्य से पहले रोका गया है या रद्द कर दिया गया है। इनमें से दादर-सावंतवाडी स्पेशल ट्रेन को चिपलून स्टेशन और सीएसएमटी-मडगांव जनशताब्दी स्पेशल ट्रेन को खेड़ स्टेशन की ओर मोड़ दिया गया है।

कोंकण रेलवे के प्रवक्ता गिरीश करंदीकर ने बताया कि इन ट्रेनों में सवार यात्री सुरक्षित हैं। तमाम परेशानियों के बावजूद कोंकण रेलवे यात्रियों को खाने-पीने का सामान मुहैया कराया जा रहा है।

करंदीकर ने कहा, ‘‘ हमने सभी फंसे हुए यात्रियों को चाय, नाश्ता और पेयजल मुहैया कराने की व्यवस्था की है।’’

कोंकण रेलवे मार्ग पिछले कुछ दिनों में दूसरी बार प्रभावित हुआ है। 19 जून को पणजी के पास पुरानी गोवा सुरंग में पानी रिसने के कारण एक दिन के लिए सेवाएं निलंबित की गई थीं।

कोंकण रेलवे का मुंबई के पास रोहा से मंगलुरु के पास स्थित थोकुर तक 756 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग है।

महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक मार्ग चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक हैं, क्योंकि यहां कई कई नदियां, घाटियां और पहाड़ हैं।

भाषा निहारिका पवनेश

पवनेश