एक प्रोफ़ेसर ऐसे जिन्हे मौत के समय भी स्टूडेंट की चिंता थी

एक प्रोफ़ेसर ऐसे जिन्हे मौत के समय भी स्टूडेंट की चिंता थी

एक प्रोफ़ेसर ऐसे जिन्हे मौत के समय भी स्टूडेंट की चिंता थी
Modified Date: November 29, 2022 / 07:57 pm IST
Published Date: March 3, 2018 10:01 am IST

 इंसान जीते जी तो बहुत कुछ कर जाता है लेकिन जो मरने के बाद भी किसी के काम आये ऐसा आम तौर पर बहुत कम देखा जाता है। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पुर्व रजिस्ट्रार औऱ अर्थसास्त्र के प्रोफेसर रहे प्रो.प्रभाकर श्रीधर का कल 85साल की उम्र में निधन हो गया.उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत से ऐसे काम किये जिससे स्टूडेंट को बहुत अधिक लाभ मिला। लेकिन उन्होंने मरने के बाद भी सिर्फ छात्रों के बारे में सोचा ये बहुत बड़ी बात है। 

ये भी पढ़े – छत्तीसगढ़ में 19 हजार से ज्यादा गांवों के नक्शे और खसरे अब ऑनलाइन

 

प्रो.प्रभाकर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के  प्रोफेसरों  थे। कुछ सालों बाद उन्हें  रजिस्ट्रार बना दिया गया था ,कहते हैं। प्रो.प्रभाकर जीते-जी  हमेशा ही छात्रों से जुड़े रहे और उनके लिए काम करते रहे.शिक्षा जगत औऱ छात्रों से उनका लगाव ऐसा था कि अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में भी वो छात्रों के लिए ही सोचते रहे. सबसे मुख्य बात ये है कि उन्होंने अपना शरीर रायपुर के पंडित जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज को आज से दस साल पहले ही कर दिया था,परिवार का कहना है कि प्रो.प्रभाकर खुद शिक्षा से जुड़े हुए थे,और मेडिकल के छात्रों की पढाइ के लिए देहदान का महत्व समझते थे,इसलिए उन्होंने अपना शरीरदान कर दिया,साथ ही वो ये चाहते थे कि बाकी लोग भी इससे प्रेरणा लें और समाज भी जागरुक हो, निधन के बाद परिवार ने अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए आज उनका पार्थिव शरीर कॉलेज प्रबंधन को सौंप दिया.

 

 

वेब टीम IBC24 


लेखक के बारे में