शिक्षाकर्मियों के लिए रमन का ट्वीट, मिल सकती है अच्छी खबर, दोहराया-परिणाम हित में होगा
शिक्षाकर्मियों के लिए रमन का ट्वीट, मिल सकती है अच्छी खबर, दोहराया-परिणाम हित में होगा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों को इस साल खुशखबरी मिल सकती है। इस साल चुनावी बरस होने के कारण सरकार भी किसी वर्ग का नाराज करना नहीं चाहती। ऐसे में उनकी संविलियन की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह लगातार कहते रहे हैं कि उन्हें इंतजार करना चाहिए। उनके पक्ष में फैसला लिया जाएगा। इस बीच सीएम ने गुरूवार को अपने ट्वीटर शिक्षाकर्मियों के लिए अच्छी खबर के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि उनके भविष्य को ध्यान में रखकर हमने एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है। उन्होंने शिक्षाकर्मियों को धैर्य रखने की सलाह देते हुए भरोसा दिलाया है कि परिणाम हित में होगा।
ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश के माथे लगा कुपोषण का कलंक, बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस उग्र
मुख्यमंत्री डॉ सिंह पहले भी कई बार शिक्षाकर्मियों को धैर्य रखने की सलाह दे चुके हैं, लेकिन जिस तरह उन्होंने ट्वीटर के जरिए संदेश दिया है, उससे माना जा रहा है कि सरकार इस संबंध में फैसला लेने वाली है। उन्होंने कहा है कि मैं सभी शिक्षाकर्मी भाइयों-बहनों से कहना चाहता हूं कि आपके भविष्य को ध्यान में रखकर हमने एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता चीफ-सेक्रेटरी कर रहे हैं। आप धैर्य रखें, आपकी प्रतीक्षा का परिणाम आपके हित मे होगा।
मैं सभी शिक्षाकर्मी भाइयों-बहनों से कहना चाहता हूं कि आपके भविष्य को ध्यान में रखकर हमने एक हाई-पॉवर कमिटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता चीफ-सेक्रेटरी कर रहे हैं। आप धैर्य रखें, आपकी प्रतीक्षा का परिणाम आपके हित मे होगा।
— Dr Raman Singh (@drramansingh) May 31, 2018
उधर, सीएम के इस ट्वीट के साथ शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा ने संविलियन का फार्मूला सुझाया है। प्रदेश संचालक वीरेंद्र दुबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की स्थिति मध्यप्रदेश से बेहतर है। यहां संविलियन के लिए मप्र से बेहतर मॉडल अपनाया जा सकता है। जिसमें मप्र की कमियों व आपत्तियों को भी दूर किया जा सकता है।
प्रदेश में कार्यरत नियमित शिक्षकों के हितों व सम्मान को सुरक्षित रखते हुए समस्त शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में समान पदनाम, सेवा शर्तें, सेवा श्रेणी, स्तर वेतनमान व सुविधाओं के साथ संविलियन किया जा सकता है। सातवां वेतनमान का निर्धारण वरिष्ठता व क्रमोन्नति के आधार पर होना चाहिए।
शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय संवर्ग के पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों का वेतन निर्धारण क्रमोन्नति के आधार पर करते हुए इसका भी समाधान किया जा सकता है। शिक्षा विभाग में वर्षों से रिक्त संस्था प्रमुख पदों पर भी पदोन्नति का प्रावधान सुनिश्चित कर पदोन्नति किया जा सकता है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में कसावट व गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके लिए शिक्षा विभाग, शिक्षक पंचायत संवर्ग व सरकार सभी को परस्पर विश्वास व परिपक्वता के साथ सकारात्मक रूप से आगे बढ़ना होगा।
प्रदेश उपसंचालक धर्मेश शर्मा व चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश से 1994-95 से शिक्षा व्यवस्था में लागू शिक्षाकर्मी की दोहरी समानांतर, असमान व असम्मानजनक व्यवस्था को समाप्त कर शिक्षाकर्मियों की समस्याओं के समग्र व स्थायी समाधान का एकमात्र व सर्वोत्तम विकल्प समस्त शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन ही है।
ये भी पढ़ें- जोगी वेंटिलेटर से बाहर,जताया आभार-पहाड़ों का सफ़र है,शीशे का बदन है ठीक हो रहा हूँ,दुआओं का असर है
प्रदेश प्रवक्ता गजराज सिंह राजपूत ने कहा कि छग सरकार मप्र से बेहतर मॉडल अपनाते हुए प्रदेश के समस्त शिक्षाकर्मियों का संविलियन का मार्ग अविलंब प्रशस्त किया जाए। छग का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसे अन्य राज्य के लिए अनुकरणीय हो। शिक्षा व्यवस्था से कर्मी कल्चर पूर्णतः समाप्त होना चाहिए। सरकार को शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर उनका सम्मान करना चाहिए. यह समाज व राष्ट्र निर्माण की दिशा में बेहतर कदम होगा।
वेब डेस्क, IBC24

Facebook


