बसपा से निलम्बित विधायकों के प्रति सपा ईमानदार होती तो उन्हें अधर में नहीं रखती : मायावती

बसपा से निलम्बित विधायकों के प्रति सपा ईमानदार होती तो उन्हें अधर में नहीं रखती : मायावती

बसपा से निलम्बित विधायकों के प्रति सपा ईमानदार होती तो उन्हें अधर में नहीं रखती : मायावती
Modified Date: November 29, 2022 / 08:20 pm IST
Published Date: June 16, 2021 5:55 am IST

लखनऊ, 16 जून (भाषा) बहुजन समाज पार्टी के निलंबित विधायकों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की खबरों के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने बुधवार को सपा पर हमला बोलते हुये कहा कि सपा अगर इन निलम्बित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती।

बुधवार को मायावती ने एक के बाद एक पांच ट्वीट कर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ”घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बसपा के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं, घोर छलावा।”

मायावती ने दूसरे ट्वीट में कहा, ”जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बसपा से निलम्बित किया जा चुका है।”

गौरतलब है कि अक्टूबर 2020 में, बसपा के सात विधायकों को पार्टी अध्यक्ष मायावती ने निलंबित कर दिया था। उन पर राज्यसभा चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार रामजी गौतम के नामांकन का विरोध करने का आरोप लगा था।

बसपा सुप्रीमो ने अगले ट्वीट में कहा, ”सपा अगर इन निलम्बित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। क्योंकि इनको यह मालूम है कि यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बसपा में आने को आतुर बैठे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, ”जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़े भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं। इसी कारण सपा सरकार में बसपा सरकार के जनहित के कामों को बन्द किया गया व खासकर भदोही को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय।”

उल्लेखनीय है कि मायावती ने अपने कार्यकाल में भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर रखा था लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने सत्ता में आने के बाद जिले का नाम बदलकर पुन: भदोही कर दिया।

बसपा प्रमुख ने कहा, ”वैसे बसपा के निलम्बित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है। उत्तर प्रदेश में बसपा जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है जो जारी रहेगा।”

गौरतलब हैं कि बसपा से हाल के महीनों में निलंबित पांच विधायकों ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी और सपा में शामिल होने के संकेत दिए थे। अखिलेश से मुलाकात करने वाले बसपा विधायकों में शामिल जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर से विधायक सुषमा पटेल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा था, ‘’सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ 15-20 मिनट तक चली बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों पर चर्चा हुई और मुलाकात अच्छी रही।’’ उनके अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर पटेल ने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से, मैंने समाजवादी पार्टी में शामिल होने का मन बना लिया है।’

वर्तमान में 403 सदस्यीय राज्य विधानसभा में बसपा के 18 विधायक हैं। अक्टूबर 2020 में, बसपा के सात विधायकों को पार्टी अध्यक्ष मायावती ने निलंबित कर दिया था। उन पर राज्यसभा चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार रामजी गौतम के नामांकन का विरोध करने का आरोप लगा था। निलंबित किये गए विधायकों में चौधरी असलम अलीर, हरगोविंद भार्गव, मोहम्मद मुस्तफा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, मोहम्मद असलम राएनी, सुषमा पटेल और वंदना सिंह शामिल थीं।

इस महीने की शुरुआत में बसपा प्रमुख ने पार्टी के विधानसभा में नेता लालजी वर्मा और अकबरपुर के विधायक राम अचल राजभर को पार्टी से निकाल दिया था। इन दोनों नेताओं पर पंचायत चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। दोनों नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

भाषा जफर मनीषा मानसी

मानसी


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