देखिए मेहगांव विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, क्या कहता है जनता का मूड-मीटर

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देखिए मेहगांव विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, क्या कहता है जनता का मूड-मीटर

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  • Publish Date - August 31, 2018 / 02:29 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:40 PM IST

भिंड। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है मध्य प्रदेश के भिंड जिले की मेहगांव विधानसभा सीट की। फिलहाल सीट पर बीजेपी का कब्जा है और चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी यहां से विधायक हैंसीट के सियासी समीकरण की बात करें तो यहां आज तक किसी एक राजनीतिक पार्टी या विधायक का दबदबा नहीं रहा हैयहां जनता पार्टी से लेकर बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी और निर्दलीयों ने मेहगांव में चुनाव जीत हासिल की हैवहीं लगातार दो बार से सीट पर बीजेपी के विधायक काबिज है। यहां ठाकुर और ब्राह्मण मतदाता बड़ी सियासी ताकत हैं।

चंबल संभाग की प्रमुख सीटों में शामिल मेहगांव विधानसभा में सियासी जंग यूं तो कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होता रहा हैलेकिन उनकी हार-जीत काफी हद तक छोटे दलों की भूमिका पर निर्भर करती हैजो कि हर विधानसभा चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियों का चुनावी गणित बिगाड़ते हैंफिलहाल ये सीट बीजेपी के कब्जे में है और यहां के विधायक चौधरी मुकेश सिंह हैं। चौधरी मुकेश सिंह 2013 के विधानसभा चुनाव में नया चेहरा थेहालांकि विधायक राकेश शुक्ला की बगावत ने बीजेपी की परेशानी जरूर बढ़ा दी थीलेकिन नतीजा चौधरी मुकेश सिंह के पक्ष में रहाअब जब चुनावी साल है तो मौजूदा विधायक एक बार फिर ताल ठोंक रहे हैंवहीं कांग्रेस मेहगांव सीट को अपने कब्जे में लाने की कोशिश में लग ग है।

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मेहगांव विधानसभा के सियासी इतिहास की बात की जाए तो 1977 में यहां से जनता पार्टी के रामेश्वर दयाल विधानसभा पहुंचेलेकिन 1980 में राय सिंह भदौरिया निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते। 1985 में कांग्रेस के रूस्तम सिंह ने यहां से जीत का परचम लहराया। 1990 में कांग्रेस के हरी सिंह ने चुनाव जीता। 1993 में सीट पर बीएसपी के टिकट पर नरेश सिंह गुर्जर ने चुनाव जीता। 1998 में बीजेपी के राकेश शुक्ला यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2003 में मेहगांव की जनता ने निर्दलीय मुन्ना सिंह को अपना विधायक चुना। 2008 में बीजेपी के राकेश शुक्ला ने दूसरी बार यहां से चुनाव जीता। 2013 में बीजेपी ने चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी को टिकट दिया, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी ओपीएस भदौरिया को मात दीइस चुनाव में बीजेपी को जहां 29733 वोट मिलेवहीं कांग्रेस को 28460 वोट मिले इस तरह जीत का अंतर 1273 वोटों का रहा। मेहगांव विधानसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरण भी चुनाव नतीजों को काफी प्रभावित करते हैंयहां ठाकुर और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैंइसके अलावा गुर्जर, बघेल, नरवरिया, राठौर, जैन और मुस्लिम मतदाता भी प्रत्याशियों के किस्मत का फैसला करते हैं

कुल मिलाकर मिशन 2018 को लेकर बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी और निर्दलीयों ने अपने गणित बैठाना शुरू कर दिया है। लेकिन कौन इसमें कितना सफल होता है, और कौन किसे सियासी मैदान में पटकनी देता है ये देखने वाली बात होगी

भिंड जिले की मेहगांव विधानसभा मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा क्षेत्रों में शामिल हैयहां से कई नेताओं ने फर्श से लेकर अर्श तक सफर तय किया हैंनेताओं को राजनीति की सीढ़ी तो बन ग मेहगांव, लेकिन आज भी इस विधानसभा के वोटर मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं। हालत ये है कि यहां से बड़ी संख्या में पलायन हो रहा है, लेकिन मौजूदा विधायक के अपने दावे है तो इन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस के साथ बाकी दल भी अपनी सियासी जमीन मेहगांव में तलाशने के लिए उतर पड़े हैं।

भिंड जिले में आने वाली मेंहगाव विधानसभा का सियासी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा हैयहां की जनता किसी भी एक राजनीतिक दल पर भरोसा नहीं करतीआंकड़े भी बताते हैं कि मेहगांव में जनता पार्टी से लेकर बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी और निर्दलीयों ने विधायक की कुर्सी तो हासिल की हैलेकिन विकास के नाम पर कुछ खास काम नहीं करायायही वजह है कि यहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं चुनावी साल है तो मेहगांव का वोटर एक बार फिर अपने विधायक से बीते पांच साल के कार्यकाल का हिसाब मांग रहा है

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मुद्दों की बात की जाए तो मेहगांव आज भी रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहद पिछड़ा नजर आता हैइसके अलावा अमायन को तहसील और रौन को नगर पंचायत घोषित करने की मांग भी बरसों से अधूरी है, जिसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा हैवहीं हरसी नहर को भरौली तक ले जाने की मांग और गाता-गुदावली गांव में खारे पानी की समस्या भी जस की तस बनी हुई है मेहगांव में बस स्टैंड नहीं के कारण आज भी यात्री सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं। जब मौजूदा विधायक खिलाफ सीधी तौर पर आवाज उठ रही है, तो विपक्ष कैसे पीछे रह सकता है। वो अभी से वोटरों को लुभाने की कोशिश मे लग गए हैं।  विपक्ष और आम जनता भले मौजूदा विधायक पर आरोप लगा रहा होलेकिन बीजेपी विधायक के मुताबिक उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में वोटरों से जो वायदें किए थे उन्हें पूरे किए हैंविधायक के मुताबिक उन्होंने वो काम किए है, जो अभी तक किसी भी विधायक ने नही किए हैं।

वहीं विधायक के दावे और स्थिति का जायजा लेने के लिए आईबीसी24 की टीम मेहगांव विधानसभा के अधिकांश इलाकों में घूमीलेकिन विधायक के रो और पावर हाउस की बातें छोड़ दें, कोई भी ऐसा काम नहीं नजर नहीं आता जिससे लोग खुश हुए हैं उनके मुताबिक मेहगांव आज भी हालत पहले से भी ज्यादा बदतर होते जा रहा है बारिश के मौसम में जलभराव की स्थिति पैदा हो रही है, तो वहीं मुख्य बाजारों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

बहरहाल इन सबके बीच मौजूदा विधायक का दावा है कि उन्होंने मेहगांव विधानसभा में विकास की वो इबारत लिखी है जो शायद अभी तक के किसी भी विधायक ने अपने कार्यकाल में नहीं लिखी हैलेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि आने वाला चुनाव बीजेपी विधायक के लिए इतना आसान नहीं रहने वाला।

भिंड़ जिले की मेहगांव विधानसभा का वोटर हर बार नए प्रत्याशी पर दांव खेलता हैलेकिन इन सबके बीच बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस के पास भी दावेदारों की लंबी फेहरिस्त हैबीजेपी में जहां मौजूदा विधायक चौधरी मुकेश सिंह टिकट के स्वाभाविक दावेदार हैंहालांकि आगामी विधानसभा चुनाव में यहां से उनके बड़े भाई चौधरी राकेश सिंह का नाम भी सामने आ रहा हैउधर कांग्रेस में भी कई नेता टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैंबीएसपी और आम आदमी पार्टी भी इस बार चुनावों को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी ने पिछले चुनाव में विधायक राकेश शुक्ला के बगावत के बावजूद मेहगांव विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता थालेकिन इस बार मेहगांव से उनके टिकट को लेकर संशय की स्थिति हैदरअसल कयास लगा जा रहे हैं कि मौजूदा विधायक मुकेश सिंह के बड़े भाई चौधरी राकेश सिंह फिर से चुनावी मैदान में उतर सकते हैंराकेश सिंह ने 2013 विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का दामन थाम लिया थादावेदारी को लेकर चौधरी राकेश सिंह खुद तो कैमरे पर नहीं आ रहे हैं, लेकिन चौधरी मुकेश सिंह ही अपने परिवार की दावेदारी को लेकर काफी दंभ भर रहे है

अगर बीजेपी मौजूदा विधायक चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी पर ही दांव खेलती हैतो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी ही पार्टी के पूर्व विधायक राकेश शुक्ला हैं। शुक्ला पूर्व में दो बार विधायक रह चुके हैं।  प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नजदीक हैं। संघ में मजबूत पकड़ रखने वाले बीजेपी जिलाध्यक्ष संजीव कांकर की नजर भी मेहगांव पर है। उन्होनें भी अपना सियासी जाल संगठन से लेकर पार्टी नेताओं के पास टिकट की दावेदारी पेश कर दी है

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वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों पर नजर डालें तो पूर्व प्रत्याशी ओपीएस भदौरिया अभी से चुनावी मैदान में हैउनके सामने सबसे बड़ी दिक्कत पिछले चुनाव में पूर्व विधायक राय सिंह भदौरिया के नाती हर्षवर्धन ने चुनौती दी थी। इस बार भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं। उनके सामने लहार विधायक डॉ. गोविंद सिंह के भांजे राहुल सिंह भदौरिया टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए भी टिकट फाइनल करने में मशक्कत करनी पड़ सकती है। इन सब के बीच आम आदमी पार्टी भी चुनावी मैदान में है आम आदमी पार्टी ने फिलहाल मेहगांव विधानसभा सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित नही किया है। लेकिन उसकी नजर दोनों दलों के बागियों पर है।

कुल मिलाकर मेहगांव में दावेदारों की भरमार है और उसके साथ ही दावे और वादों की भी भीड़ हैऐसे में आम मतदाता के सामने तो सही प्रत्याशी को चुनने की चुनौती होगी ही साथ ही पार्टियों के लिए भी बगावत से बच पाना आसान नहीं होगा।

वेब डेस्क, IBC24