छत्तीसगढ़ में सीएम Vs पूर्व सीएम.. कर्ज-धर्मांतरण और धान खरीदी जैसे मुद्दों पर हर दिन तेज हो रही जुबानी जंग

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को अभी काफी समय है..लेकिन सियासी अखाड़े की मोर्चाबंदी में दांव पेंच शुरू हो गए हैं.. मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच जुबानी जंग तेज हर दिन तेज और तल्ख हो चली है

Edited By: , September 15, 2021 / 10:17 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को अभी काफी समय है..लेकिन सियासी अखाड़े की मोर्चाबंदी में दांव पेंच शुरू हो गए हैं.. मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच जुबानी जंग तेज हर दिन तेज और तल्ख हो चली है.. दोनों किसी न किसी मुद्दे पर एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं..कर्ज, धर्मांतरण और धान खरीदी जैसे मुद्दों पर भूपेश बघेल और रमन सिंह आमने-सामने हैं.. अब सवाल ये है कि.. वार-पलटवार और इस प्रतिक्रियावादी सियासत के मायने क्या हैं..? क्या ये तैयारी 2023 के सत्ता संग्राम के लिए है…?

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छत्तीसगढ़ में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इन दिनों जुबानी लड़ाई तेज हो गई है.. दो शीर्ष नेता..सीएम भूपेश बघेल और पूर्व सीएम रमन सिंह आमने-सामने हैं.. एक सिलसिला सा चल पड़ा है..वार और पलटवार का…नई जंग का सबब है कर्ज..दरअसल राज्य सरकार ने विकास कार्यों के लिये RBI से 1 हजार करोड़ का कर्ज लिया..जिसे मुद्दा बनाते हुए बीजेपी ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया..

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इस आरोप पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ऐसी कौन सी बीजेपी की राज्य सरकार है जो कर्ज नहीं लेती..क्या मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात कर्ज नहीं ले रहे हैं.. सीएम ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह जब वित्त मंत्री थे तो कर्ज लेते थे और जितने भी काम किए कर्ज लेकर किए.. रमन सिंह हमको नसीहत ना दें और ना ही लोगों को गुमराह करें..

जिसपर रमन सिंह ने भी जवाबी पलटवार किया कि..हम कर्ज लेने के विरोधी नहीं हैं..लेकिन कर्ज की राशि का उपयोग क्या विकास पर किया जा रहा…ये बड़ा सवाल है.. वर्धा की तर्ज पर सेवाग्राम बनाने का प्रस्ताव हो या फिर.. धान खरीदी और धर्मांतरण का मुद्दा.. दोनों नेताओं के बीच वार-पलटवार जारी है..मुद्दे बदल जाते हैं..पर जंग जारी रहती है।

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बहरहाल पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री की इस फाइट से लगने लगा है कि…मिशन 2023 से पहले दोनों नेता अपनी जमीन पक्की करने की कोशिश कर रहे हैं..वजह चाहे जो भी हो.. दोनों नेताओं के बयानबाजी से माहौल गरम हो चुका है. अब देखना ये है कि बयानों की जंग आखिर कहां तक पहुंचती है?