अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने पर अपर मुख्य सचिव(गृह) को फटकार

अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने पर अपर मुख्य सचिव(गृह) को फटकार

अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने पर अपर मुख्य सचिव(गृह) को फटकार
Modified Date: June 7, 2026 / 10:20 pm IST
Published Date: June 7, 2026 10:20 pm IST

लखनऊ, सात जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अदालत के निर्देशों का पालन न करने को लेकर उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को कड़ी फटकार लगाई है।

उच्च न्यायालय ने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद के खिलाफ अदालत के निर्देशों का पालन न करने और एक आपराधिक मामले की जांच में देरी को लेकर कड़ी टिप्पणी की है।

पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संजय प्रसाद को अदालत के आदेशों की कोई विशेष परवाह नहीं है। अदालत ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि राज्य सरकार को उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश क्यों न दिया जाए।

उच्च न्यायालय ने कहा, “गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) का आचरण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उन्हें इस अदालत द्वारा पारित आदेशों की भी कोई परवाह नहीं है।”

पीठ ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा है और दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में हलफनामे दाखिल नहीं किए गए तो दोनों अधिकारियों को 15 जुलाई को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने 20 मई को गायत्री देवी द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया था।

याचिकाकर्ता ने लखनऊ के एक थाने में नौ जनवरी, 2025 को दर्ज प्राथमिकी की निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराने की मांग की है। मामला आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति के दुरुपयोग के आरोपों से संबंधित है।

जांच की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि अदालत के बार-बार दिए गए निर्देशों और जांच अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।

पीठ ने कहा कि यदि उच्च न्यायालय की निगरानी वाले मामले में इस प्रकार का लापरवाह रवैया अपनाया जा रहा है, तो अन्य मामलों की जांच की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

अदालत ने यह भी पाया कि संजय प्रसाद द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे में कई विसंगतियां थीं, जिससे प्रतीत होता है कि न्यायालय की पूर्व टिप्पणियों और निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

पीठ ने इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी न हो पाने को भी अस्वीकार्य बताया।

अपने आदेश में अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस मामले में समय-समय पर पारित आदेशों में इंगित की गई कमियों के संबंध में राज्य सरकार का रुख स्पष्ट करें।

न्यायालय ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा है कि किसके निर्देश पर विशेष सचिव महेंद्र सिंह ने पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अमित कुमार आनंद को अपना नियमित सरकारी कार्य छोड़कर अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया, जबकि उनकी उपस्थिति के लिए कोई न्यायिक आदेश पारित नहीं किया गया था।

भाषा

सं, आनन्‍द रवि कांत


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