लखनऊ विश्वविद्यालय में आत्महत्या रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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लखनऊ विश्वविद्यालय में आत्महत्या रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 09:18 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 09:18 PM IST

लखनऊ, 10 सितंबर (भाषा) विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल, साइकी हब क्लब और हैप्पी थिंकिंग लैबोरेटरी की ओर से “उम्मीद: बियॉन्ड द साइलेंस” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना और समय पर सहायता लेने के महत्व को रेखांकित करना था।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मनोविज्ञान विभाग के सभागार में फिल्म ‘छिछोरे’ के चुनिंदा अंश दिखाए गए। इसके बाद शैक्षणिक और सामाजिक दबाव, असफलता, कठिन परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, भावनात्मक परेशानियों और सहायता लेने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि असफलता और कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति का मूल्य तय नहीं करतीं तथा सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस की निशानी है।

प्राण फाउंडेशन के विद्यार्थियों ने आत्महत्या रोकथाम पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से भावनात्मक परेशानी के संकेतों को पहचानने, बिना किसी पूर्वाग्रह के लोगों की बात सुनने और संवेदनशीलता के साथ समय पर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. अर्चना शुक्ला ने उन्हें साहस के साथ चुनौतियों का सामना करने, निरंतर आगे बढ़ते रहने और जीवन के कठिन दौर में कभी हार न मानने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. मानिनी श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से संघर्षशील भावना विकसित करने और सकारात्मक बदलाव का वाहक बनने का आह्वान किया। उन्होंने सभी को करुणा की एक शृंखला बनाने, आशा का संदेश फैलाने और भावनात्मक उथल-पुथल से गुजर रहे लोगों की मदद के लिए आगे आने को कहा।

विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में आयोजित “द ट्री ऑफ होप” गतिविधि के तहत विद्यार्थियों ने पेड़ पर पत्तियों के रूप में अपने संदेश लगाए। इन संदेशों में उन्होंने बताया कि जीवन सुंदर क्यों है और कौन-सी बातें जीवन को जीने योग्य बनाती हैं। यह गतिविधि कृतज्ञता, आशा और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की सामूहिक अभिव्यक्ति बनी।

कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए “मिस्ट्री बॉक्स” के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी चिंताओं और भावनात्मक परेशानियों को निजी एवं गुमनाम रूप से साझा करने तथा उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर दिया गया।

काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से जागरूकता पुस्तिकाएं भी वितरित की गईं। इनमें भावनात्मक परेशानी के संकेतों, बचाव के उपायों, साथियों की सहायता करने के तरीकों तथा संबंधित हेल्पलाइन नंबरों और पेशेवर सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई।

भाषा

जफर रवि कांत