UP News: ‘पहले अपने गिरेबां में झांकें अखिलेश’… MSP और किसानों के मुद्दे पर कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही का सपा पर हमला

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MSP और किसानों के मुद्दे पर कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही का सपा पर हमला, Cabinet Minister Surya Pratap Shahi attacks SP on MSP and farmers' issue

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 07:20 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 07:20 PM IST

लखनऊ। कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने MSP, गन्ना भुगतान, किसानों की बिजली और रोजगार के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल की तुलना योगी सरकार से करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को सरकार पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए।

‘उनके जमाने में धान की MSP ₹1310, आज ₹2385’

सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के समय धान की MSP ₹1310 और गेहूं की MSP ₹1400 थी। इसके मुकाबले योगी सरकार में पिछले साल धान की MSP ₹2385 और गेहूं की ₹2450 दी गई। उन्होंने कहा कि 2017 के चुनाव से पहले प्रचार के दौरान धान ₹700 से ₹800 में बिकता था। आज उत्तर प्रदेश में धान ₹2400, ₹2500, ₹2600 और ₹2700 तक में बिक रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार में गेहूं का भाव भी ₹2800 तक पहुंचा है। शाही ने कहा कि MSP बढ़ने से बाजार का रेट भी उठा है और इसका फायदा किसान को मिला है।

‘सपा राज में साल-साल तक भुगतान नहीं होता था’

किसानों के भुगतान को लेकर भी सूर्य प्रताप शाही ने सपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय किसान MSP पर फसल बेचता था, लेकिन उसका भुगतान साल-साल और दो-दो साल तक नहीं होता था। उन्होंने बुंदेलखंड में किसान आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वहां लगातार किसान आत्महत्या करते थे। वहीं योगी सरकार की व्यवस्था का जिक्र करते हुए शाही ने कहा कि अब किसान के खाते में सीधे भुगतान होता है और तीन से चार दिन, अधिकतम सात दिन के भीतर पैसा पहुंच जाता है।

गन्ने के भुगतान पर भी अखिलेश को घेरा

गन्ना मूल्य और भुगतान को लेकर सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के समय गन्ने का दाम ₹280 तय किया गया था और इसका भुगतान तीन किस्तों में किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 40 प्रतिशत, फिर 40 प्रतिशत और अंत में 20 प्रतिशत भुगतान होता था और यह 20 प्रतिशत राशि तीन-चार साल बाद तक अटकी रहती थी। शाही ने कहा कि योगी सरकार बनने के समय तीन पेराई सत्रों का करीब ₹10 हजार करोड़ बकाया छोड़ा गया था, जिसका भुगतान योगी सरकार ने किया। उनके मुताबिक अब तक ₹3.5 लाख करोड़ गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है। इस साल गन्ना मूल्य में ₹25 की बढ़ोतरी की गई है और ₹400 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ₹36,500 करोड़ में से ₹34 हजार करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।

‘किसान के ट्यूबवेल की बिजली माफ’

सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के ट्यूबवेल से चलने वाली बिजली को माफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार इसके लिए ₹2600 करोड़ का खर्च वहन कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था के बावजूद अखिलेश यादव सरकार पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। शाही ने कहा कि उन्हें अनावश्यक अफवाह और गलत बातें फैलाने के बजाय अपने ऊपर पुनर्विचार करना चाहिए। सूर्य प्रताप शाही ने सपा सरकार के कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में लूट-खसोट, योजनाओं में भ्रष्टाचार और पुलिस के ऊपर गुंडों का प्रभाव था। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग कांड का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पुलिस के एडिशनल एसपी की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने अन्य घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय अपराधियों के हौसले बुलंद थे। शाही ने कहा कि आज गुंडों के वे हौसले पस्त हो चुके हैं और उत्तर प्रदेश की जनता अब गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेगी। सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के दौरान अपहरण, फिरौती, लूट और रैनसम वसूली का माहौल था। उन्होंने इसे उस दौर का ‘उद्योग’ बताते हुए आरोप लगाया कि लोगों का अपहरण किया जाता था, फिरौती मांगी जाती थी और भारी रकम लेकर छोड़ा जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में यह सब खत्म हो चुका है।

‘9.5 लाख से ज्यादा लोगों को पारदर्शी तरीके से नौकरी’

सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में 9.5 लाख से ज्यादा लोगों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में कार्यक्षमता बढ़ी है और पब्लिक सर्विस कमीशन की कार्यप्रणाली को बेहतर किया गया है। शाही ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान पब्लिक सर्विस कमीशन, सबऑर्डिनेट सर्विस कमीशन और शिक्षक भर्ती बोर्ड जैसी संस्थाएं ध्वस्त हो गई थीं और नौकरी की नीलामी होती थी। उन्होंने कहा कि अब यह व्यवस्था बंद हो गई है और इसी वजह से समाजवादी पार्टी के ‘पेट में दर्द’ है और अखिलेश यादव बेचैन हैं।