जनगणना कार्यों के दौरान ‘‘जाति गणना’’ भी की जाएगी: जनगणना निदेशक शीतल वर्मा
जनगणना कार्यों के दौरान ‘‘जाति गणना’’ भी की जाएगी: जनगणना निदेशक शीतल वर्मा
लखनऊ, दो मई (भाषा) उत्तर प्रदेश की जनगणना निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी ने शनिवार को कहा कि जनगणना के दौरान ‘‘जाति गणना’’ भी की जाएगी।
जनगणना निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘हम हर आम नागरिक तक पहुंच रहे हैं और उनकी गणना कर रहे हैं। हम घरों की गिनती कर रहे हैं और घरेलू संपत्ति के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रह रहे हैं। दूसरा चरण फरवरी में निर्धारित है और जब हम दूसरे चरण में जाएंगे तो व्यक्तिगत विशेषताओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, हम साक्षरता स्तर और व्यक्ति के व्यवसाय की प्रकृति पर डेटा एकत्र करने वाले हैं। इस बार, एक जाति गणना भी की जाएगी। जाति आधारित जनगणना वास्तव में की जाएगी।’’
वर्मा ने कहा कि जो जनगणना होने वाली है वह आजादी के बाद से आठवीं और 1872 में शुरू हुई इस श्रृंखला की 16वीं जनगणना होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘जनसंख्या के संदर्भ में, यदि आप आम तौर पर किसी विशेष स्थान पर रह रहे हैं, तो आपको उस क्षेत्र की आबादी का हिस्सा माना जाता है और आपकी गणना की जाएगी। जब तक आपके पास राजनयिक छूट न हो या आप किसी अन्य देश के नागरिक न हों, आपको जनसंख्या का हिस्सा माना जाएगा और आपकी गणना की जाएगी।’’
वर्मा ने कहा कि क्षेत्र से तात्पर्य उस भौगोलिक क्षेत्र से है जिसकी सीमाएं जनगणना के उद्देश्य से प्रभावी रूप से ‘‘स्थायी’’ कर दी गई हैं ।
उन्होंने कहा, ‘‘31 मार्च, 2027 तक ‘‘कोई नयी तहसील नहीं बनाई जाएगी, कोई नया राज्य नहीं बनाया जाएगा, कोई नया राजस्व गांव स्थापित नहीं किया जाएगा तथा कोई नया प्रशासनिक ब्लॉक गठित नहीं किया जाएगा।’’
अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘इस कदम के पीछे तर्क वह यह है कि पूरी होने के बाद, प्राप्त आंकड़ों को राजस्व-ग्राम-वार और वार्ड-वार प्रकाशित किया जाता है।’’
उन्होंने कहा कि जनगणना अपनी तरह का एकमात्र ऐसा अभियान है जो वास्तव में सार्वभौमिक है।
वर्मा ने कहा, ‘‘हम हर एक नागरिक, हर व्यक्ति तक पहुंचेंगे और उनकी गिनती करेंगे।’’
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त, मृत्युंजय कुमार नारायण ने 30 मार्च को लोगों से गणना कर्मियों को सटीक जानकारी प्रदान करने की अपील की थी। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया था कि उनका व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा और इसका उपयोग साक्ष्य के रूप में या किसी भी योजना के तहत कोई लाभ प्राप्त करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
नारायण ने कहा था कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत इसे किसी भी संगठन के साथ साझा नहीं किया जा सकता है, चाहे वह सरकारी हो या निजी, या अदालत में साक्ष्य के रूप में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा था कि सारणीकरण प्रयोजनों के लिए केवल सांख्यिकीय समग्र डेटा का उपयोग किया जाएगा।
जनगणना में जाति को शामिल किए जाने और इस आशंका के बारे में पूछे जाने पर कि लोग सही जानकारी नहीं दे पाएंगे, नारायण ने कहा था कि जाति से संबंधित डेटा दूसरे चरण के दौरान एकत्र किया जाएगा और विस्तृत चर्चा के बाद प्रश्नों पर निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जाति संबंधी जानकारी कैसे एकत्र की जाए, इस पर कई सुझाव हैं। उन्होंने कहा कि उन सभी पर विचार किया जाएगा और प्रश्नों को अंतिम रूप देने से पहले सर्वश्रेष्ठ विचार को सामने रखा जाएगा।
अंतिम व्यापक जाति-आधारित गणना 1881 और 1931 के बीच की गई थी।
स्वतंत्रता के बाद से अब तक की सभी जनगणनाओं में जाति को शामिल नहीं किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों पर कैबिनेट की समिति ने पिछले साल 30 अप्रैल को आगामी जनगणना में जाति गणना को शामिल करने का निर्णय लिया था।
नारायण ने कहा कि भारतीय एजेंसियों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुरूप डिजिटल सुरक्षा के लिए कड़े उपाय किए गए हैं।
भाषा अरूणव जफर सुरभि राजकुमार
राजकुमार

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