अदालत ने मोदी रबर की 59 एकड़ जमीन के ‘गैर-कानूनी’ अंतरण की नयी सिरे से जांच का आदेश दिया

अदालत ने मोदी रबर की 59 एकड़ जमीन के ‘गैर-कानूनी’ अंतरण की नयी सिरे से जांच का आदेश दिया

अदालत ने मोदी रबर की 59 एकड़ जमीन के ‘गैर-कानूनी’ अंतरण की नयी सिरे से जांच का आदेश दिया
Modified Date: September 3, 2026 / 11:22 pm IST
Published Date: September 3, 2026 11:22 pm IST

लखनऊ, तीन सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सरकारी अनुदान अधिनियम के तहत मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ में से 59 एकड़ जमीन के कथित गैर-कानूनी अंतरण की नये सिरे से जांच का आदेश दिया है।

अदालत ने ‘बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’ के अधिकारियों की एक समिति को छह हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

पीठ ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट मिलने के तीन हफ्ते के अंदर इस पर फैसला ले।

पीठ ने अपने पहले के निर्देशों का पालन करने में हुई देर पर सख्त नाराजगी जताते हुए राज्य पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और यह रकम जनहित में मामला लड़ रहे याचिकाकर्ता को दी जाएगी।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने लोकेश कुमार खुराना की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई की तारीख आगामी 18 नवंबर नियत की गयी है।

राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा पिछले आदेश के पालन में दो सितंबर को पीठ के सामने पेश हुईं और अदालत को बताया कि जिला स्तर की शुरुआती जांच में जमीन अंतरण के आरोप सही पाए गए थे और चूंकि राज्य स्तर पर निर्णय लिया जाना था इसलिए 24 फरवरी 2024 को ‘बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’ के अधिकारियों को जांच का काम सौंपा गया था।

अपर्णा ने बताया कि जांच रिपोर्ट तीन जून 2025 को मिली थी लेकिन वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद तीन दिसंबर 2025 के एक पत्र के माध्यम से समिति के सदस्यों को एक और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया। हालांकि याद दिलाने के बावजूद अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि ‘सरकारी अनुदान अधिनियम’ के तहत मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ ज़मीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन राज्य सरकार की मंजूरी लिए बिना अंतरित कर दी गई थी।

हालांकि, इस मामले पर कंपनी का अपना पक्ष है।

मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि आठ अक्टूबर 2025 के आदेश के बावजूद पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल न करने का कोई उचित कारण नहीं हो सकता।

पीठ ने ‘बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’ के अधिकारियों वाली जांच समिति द्वारा समय पर रिपोर्ट न सौंपने और मामले को लटकाए रखने के लिए भी कोई उचित कारण नहीं पाया।

पीठ को बताया गया कि नई जांच समिति में उत्तर प्रदेश के राजस्व परिषद के विशेष अधिशासी अधिकारी राज कुमार द्विवेदी, मेरठ के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), मेरठ के मुख्य कोषागार अधिकारी और सरधना के उप जिलाधिकारी शामिल हैं।

भाषा सं. सलीम शफीक

शफीक


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