लखनऊ, 27 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी और कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही बुधवार को रद्द कर दी। यह कार्यवाही श्रमिक कानूनों के कथित उल्लंघन को लेकर शुरू की गई थी।
अदालत ने इस मामले में एक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को भी दरकिनार कर दिया। यह आदेश प्रेमजी और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति जफीर अहमद द्वारा पारित किया गया।
यह मामला श्रम विभाग द्वारा दायर एक शिकायत से पैदा हुआ जिसमें विप्रो के गाजियाबाद कार्यालय में श्रम कानूनों का अनुपालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया। इस शिकायत पर एक स्थानीय मजिस्ट्रेट की अदालत ने प्रेमजी और कंपनी के अन्य अधिकारियों को समन जारी किया था जिसके बाद इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
अदालत ने कहा, श्रम कानूनों के तकनीकी उल्लंघन से जुड़े मामलों में कंपनी के चेयरमैन जैसे शीर्ष कार्यकारियों को तब तक जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता दर्शाते हुए विशेष आरोप न लगाए गए हों।
भाषा सं राजेंद्र शोभना
शोभना