मेरठ में सील की गईं 44 संपत्तियों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की
मेरठ में सील की गईं 44 संपत्तियों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की
मेरठ (उप्र), 22 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (यूपीएचडीबी) ने मेरठ में सील की गईं 44 सील संपत्तियों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
परिषद ने इन संपत्तियों का सर्वे पूरा करा लिया है और अगले दो-चार दिन में संबंधित भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
आवास उपायुक्त अनिल कुमार सिंह ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के दायरे में कुल 859 संपत्तियां आती हैं जिनमें सेंट्रल मार्केट की 44 सील दुकानें, आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों के लिये निर्मित लगभग 350 घर और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिये बनाये गये 150 से 200 मकान शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल कार्रवाई 44 सील दुकानों से शुरू की जा रही है और इन दुकानों के मालिकों को अगले दो-तीन दिन में नोटिस जारी किए जाएंगे।
सिंह ने बताया कि अगर नोटिस अवधि में अवैध निर्माण स्वयं नहीं हटाया गया तो परिषद ध्वस्तीकरण कराएगी और उसका खर्च संबंधित संपत्ति मालिकों से वसूलेगी।
सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के ताजा आदेश में शहर के अन्य आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक उपयोग वाली संपत्तियों को भी चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा, ”पहले 44 सील दुकानों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद शहर के अन्य हिस्सों में भी अभियान चलाया जाएगा।”
सिंह ने बताया कि जिन भवनों में एक से अधिक मालिक हैं, वहां किसी प्रकार के विवाद से बचने और प्रत्येक हिस्से में हुए अवैध निर्माण का सही आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीम से पैमाइश कराई गई है।
आवास उपायुक्त ने कहा कि सर्वे के दौरान कुछ व्यापारियों ने बिना नोटिस कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने बताया कि उन्हें पहले ही बैठक में सर्वे की जानकारी दे दी गई थी और ध्वस्तीकरण से पहले सभी संबंधित लोगों को नियमानुसार नोटिस दिए जाएंगे।
उच्चतम न्यायालय में इस मामले पर अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
इस बीच, कार्रवाई से प्रभावित व्यापारियों ने अपने भविष्य और आजीविका को लेकर चिंता व्यक्त की है।
इलाके के कपड़ा कारोबारी आलोक सोम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उनकी दुकान 43 वर्ष पुरानी है और पूरे परिवार की आजीविका इसी पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीने से दुकान पूरी तरह बंद है, जबकि घर का खर्च, दवाइयों और बच्चों की पढ़ाई जैसे खर्च लगातार जारी हैं।
सोम ने कहा कि अगर कार्रवाई हुई तो वर्षों से स्थापित कारोबार और हजारों परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार कहीं दूसरी जगह दुकान भी उपलब्ध करा दे, तब भी वर्षों का कारोबार, ग्राहक और सामाजिक जुड़ाव वापस नहीं मिल सकता।
सर्राफा व्यवसायी संजय वर्मा ने कहा कि उनकी दुकान वर्ष 1985 से है और वर्ष 1996 से वह स्वयं इसे संचालित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आदेश के बाद परिवार की आय का मुख्य स्रोत बंद हो गया है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
उन्होंने सरकार से प्रभावित व्यापारियों के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने की अपील की।
साड़ी कारोबारी मनोज गर्ग ने आदेश को दुखद और कष्टकारी बताते हुए कहा कि 35-40 वर्षों की मेहनत से किया गया कारोबार प्रभावित हो रहा है और व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
उधर, भारतीय जनता पार्टी व्यापार प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ई-मेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के प्रभावित व्यापारियों और परिवारों की समस्या से अवगत कराया है।
उन्होंने दोनों नेताओं से व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय देने का अनुरोध करते हुए कहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों का सम्मान बनाए रखते हुए ऐसा मानवीय समाधान निकाला जाए, जिससे हजारों छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।
भाषा सं. सलीम
जोहेब
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