पीलीभीत में बैंक से ऋण के लिए फर्जी हस्ताक्षर कर अभिलेखों का उपयोग कर डीएफओ से धोखाधड़ी

पीलीभीत में बैंक से ऋण के लिए फर्जी हस्ताक्षर कर अभिलेखों का उपयोग कर डीएफओ से धोखाधड़ी

पीलीभीत में बैंक से ऋण के लिए फर्जी हस्ताक्षर कर अभिलेखों का उपयोग कर डीएफओ से धोखाधड़ी
Modified Date: March 6, 2026 / 10:35 pm IST
Published Date: March 6, 2026 10:35 pm IST

पीलीभीत, छह मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के पीलीभीत बाघ अभयारण्य (पीटीआर) के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) के जाली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी प्रपत्रों का उपयोग कर बैंक से करोड़ों रुपये का ऋण लेने की कोशिश करने का मामला सामने आया है। धोखाधड़ी सामने आने के बाद पीड़ित डीएफओ ने पीलीभीत पुलिस अधीक्षक (एसपी) को शिकायत पत्र भेजकर आरोपी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

डीएफओ मनीष सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया वन विभाग ने बैंक को भी इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर कोई ऋण स्वीकृत नहीं करने की सूचना दे दी है। क्षेत्रीय वनाधिकारी (बराही) को थाना माधौटांडा में उपस्थित होकर प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सिंह ने बताया कि धोखाधड़ी का यह प्रकरण पूरनपुर तहसील के ग्राम अमृतपुर निवासी नरेंद्र सिंह से संबंधित है, जो ग्राम अर्जुनपुर की अपनी निजी भूमिपर ‘मैसर्स एम.के. फूड्स’ के नाम से चावल मिल का निर्माण करा रहे हैं।

आरोप है कि इस चावल मिल के लिए बैंक ऑफ इंडिया की पूरनपुर शाखा से लोन प्राप्त करने के उद्देश्य से नरेंद्र सिंह ने डीएफओ मनीष सिंह के फर्जी हस्ताक्षर और कार्यालय की जाली मुहर का इस्तेमाल कर एक जाली पत्र तैयार किया। इस जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब बैंक ने पत्र के सत्यापन के लिए पत्रावली डीएफओ कार्यालय भेजी।

विभाग के डिस्पैच रजिस्टर की जांच करने पर संबंधित पत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पत्र पूरी तरह से फर्जी था और विभाग द्वारा कभी जारी नहीं किया गया था।

प्रभागीय वनाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीलीभीत पुलिस अधीक्षक को औपचारिक तहरीर भेजी है। इसमें अनुरोध किया गया है कि आरोपी नरेंद्र सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाना प्रभारी को निर्देश दिए जाएं।

भाषा

सं, आनन्‍द रवि कांत


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