लखनऊ में जिला एवं सत्र न्यायालय के पास अवैध अतिक्रमण पर उच्च न्यायालय का सख्त रुख

लखनऊ में जिला एवं सत्र न्यायालय के पास अवैध अतिक्रमण पर उच्च न्यायालय का सख्त रुख

लखनऊ में जिला एवं सत्र न्यायालय के पास अवैध अतिक्रमण पर उच्च न्यायालय का सख्त रुख
Modified Date: March 24, 2026 / 11:29 pm IST
Published Date: March 24, 2026 11:29 pm IST

लखनऊ, 24 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को कैसरबाग में जिला एवं सत्र अदालत के आस-पास हुए अवैध अतिक्रमण पर कड़ा रुख अपनाते हुए लखनऊ नगर निगम को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

अदालत ने नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई पर सात अप्रैल तक रिपोर्ट तलब की है।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने अधिवक्ता अनुराधा सिंह, देवांशी श्रीवास्तव और देवांशी की मां अरुणिमा श्रीवास्तव द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता सुजीत कुमार बाल्मीकि द्वारा अपने खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बाल्मीकि के वरिष्ठ साथी अधिवक्ता श्रवण कुमार ने उनके घर के पास अवैध रूप से अपना चैंबर बना लिया है और शाम को अदालत बंद होने के बाद शराब पीने के बाद वहां हंगामा होता है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जब वे इस पर आपत्ति जताते हैं तो अक्सर कहा-सुनी हो जाती है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इसी वजह से उनके खिलाफ एक झूठी रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जबकि उन्होंने घटना वाले दिन ही पहले ही एक प्राथमिकी दर्ज करा दी थी।

अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को दर्ज प्राथमिकी के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया।

पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस मामले में निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पुराने उच्च न्यायालय परिसर में बेतरतीब ढंग से अवैध अतिक्रमण किया गया था। इस अतिक्रमण में न केवल वकीलों के चैंबर शामिल हैं, बल्कि फोटोकॉपी और टाइपिंग की दुकानें और यहां तक कि खाने-पीने की दुकानें भी शामिल हैं।

अदालत ने इस पर नाराजगी व्यक्त की और नगर निगम से एक रिपोर्ट तलब की। नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि क्षेत्र में लगभग 72 अतिक्रमण पाए गए, जिनमें से अधिकांश वकीलों के चैंबर और कुछ अवैध रूप से निर्मित दुकानें हैं।

नगर निगम ने अदालत को सूचित किया कि अतिक्रमण हटाने के लिए पहले नोटिस जारी करना जरूरी होगा और इसके बाद पुलिस तथा जिला प्रशासन की मदद से कार्रवाई की जाएगी।

इस पर अदालत ने कहा कि आम तौर पर अधिकृत निर्माण के मामलों में नोटिस देना ज़रूरी होता है लेकिन अवैध अतिक्रमण के मामलों में तत्काल कार्रवाई की जा सकती है और कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि अगर अतिक्रमण करने वालों को नोटिस प्राप्त नहीं होता है, तो उसे मौके पर चस्पा दिया जाए और प्रमुख हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए।

अदालत ने नगर निगम को अगली सुनवाई तक उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया।

भाषा सं सलीम धीरज

धीरज


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