जेएनयू की घटना निंदनीय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अराजकता स्वीकार नहीं: विहिप

जेएनयू की घटना निंदनीय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अराजकता स्वीकार नहीं: विहिप

जेएनयू की घटना निंदनीय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अराजकता स्वीकार नहीं: विहिप
Modified Date: January 7, 2026 / 02:39 pm IST
Published Date: January 7, 2026 2:39 pm IST

मेरठ (उप्र), सात जनवरी (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में प्रधानमंत्री सहित अन्य के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी ‘कब्र खोदने वाली मानसिकता’ से समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

यहां जारी एक बयान में आलोक कुमार ने कहा कि दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने को लेकर आधी रात में जेएनयू परिसर का माहौल खराब किया गया, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि शर्मनाक और कायरतापूर्ण भी है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे पवित्र शैक्षणिक परिसरों का इस प्रकार राजनीतिक उकसावे और अभद्र नारों के लिए इस्तेमाल किया जाना देश की अकादमिक परंपराओं के खिलाफ है।

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विहिप अध्यक्ष ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि अभियोजन पक्ष के पास दोनों आरोपितों के खिलाफ दिल्ली दंगों में संलिप्तता से जुड़े प्रत्यक्ष और पुष्ट साक्ष्य हैं।

उन्होंने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम पर भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए मुकदमे की प्रतीक्षा करना ही लोकतांत्रिक मर्यादा है।

आलोक कुमार ने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी को भी कानून हाथ में लेने या हिंसा व नफरत को बढ़ावा देने का अधिकार नहीं देती। ‘कब्र खोदने’ जैसे नारे ना केवल अभद्र हैं बल्कि आपराधिक प्रकृति के भी हैं।

उन्होंने जेएनयू प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने का स्वागत करते हुए मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाए।

भाषा सं जफर मनीषा संतोष

संतोष


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