फिल्म ‘बंटवारा 1947’ फिर से साबित करेगी कि इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं : सनी देओल

फिल्म ‘बंटवारा 1947’ फिर से साबित करेगी कि इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं : सनी देओल

फिल्म ‘बंटवारा 1947’ फिर से साबित करेगी कि इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं : सनी देओल
Modified Date: August 8, 2026 / 03:53 pm IST
Published Date: August 8, 2026 3:53 pm IST

लखनऊ, आठ अगस्‍त (भाषा) मशहूर सिने अभिनेता सनी देओल ने कहा कि उनकी जल्द आने वाली फिल्‍म ‘बंटवारा 1947’ दर्शकों को यह एहसास कराएगी कि इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं है। इसके साथ ही उन्‍होंने युवाओं से अपील की कि वे बंटवारे की मानवीय भावनाओं को महसूस करने के लिए इसे जरूर देखें।

सनी देओल अपने बेटे करण देओल और अभिनेत्री प्रीति जिंटा के साथ शुक्रवार को लखनऊ में अपनी फिल्म का प्रमोशन करने पहुंचे थे।

यह फिल्म 14 अगस्त को रिलीज होने वाली है। आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित यह फिल्म हिंदी के मशहूर साहित्यकार प्रोफेसर असगर वजाहत के नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या ओ जम्याई नई’ पर आधारित है।

‘जिस लाहौर नई वेख्या ओ जम्याई नई’ मतलब है ‘जिसने लाहौर नहीं देखा, उसने मानो जन्म ही नहीं लिया यानी उसने कुछ नहीं देखा’। यह साफ करते हुए कि यह फिल्म उनकी 2001 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ से अलग है, जो भारत-पाकिस्तान के रिश्तों और बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी थी। देओल ने कहा कि पिछली फिल्म मुख्य रूप से एक प्रेम कहानी थी।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान देओल ने कहा, ‘‘ फिल्म ‘गदर’ बंटवारे के समय की एक खूबसूरत प्रेम कहानी थी, लेकिन वह पूरी तरह से एक प्रेम कहानी थी। ‘बंटवारा 1947’ उपन्यास ‘जिस लाहौर नई वेख्या ओ जम्याई नई’ पर आधारित है, जिसे राजकुमार संतोषी ने फिल्म के लिए रूपांतरित किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘अगर आपको ट्रेलर पसंद आया, तो मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि आपको फिल्म भी पसंद आएगी।’

संतोषी के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए देओल ने कहा कि उनका साथ ‘घायल’ से शुरू हुआ और ‘दामिनी’ और ‘घातक’ तक जारी रहा। ये सभी 1990 के दशक की सफल फ़िल्में थीं।

उन्होंने कहा, ‘राजकुमार संतोषी और मैंने साथ में बहुत अच्छा काम किया है। हमारा सफ़र ‘घायल’ से शुरू हुआ, जिसके बाद ‘दामिनी’ और फिर ‘घातक’ बनी। इन्हीं तीन फिल्मों की वजह से हम आज भी साथ हैं और इसलिए हम चौथी फिल्म साथ कर पा रहे हैं।’’

देओल ने कहा कि उनकी पिछली सभी फिल्मों में अलग-अलग किरदार और कहानियां थीं, और ‘बंटवारा 1947’ भी इसी तरह की एक अलग कहानी है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसी फिल्म है जिसे सभी बच्चों और आज के युवाओं को देखना चाहिए। उन्हें पता चलेगा कि बंटवारे के दौरान परिवारों के साथ क्या हुआ था, उस समय जब लोगों को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है। इस फिल्म को देखने के बाद, आपको यकीन हो जाएगा कि इस दुनिया में इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं है।’’

आठ साल के अंतराल के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं प्रीति जिंटा ने कहा कि ‘बंटवारा 1947’ उनकी 2004 की सफल फिल्म ‘वीर-जारा’ से अलग है, भले ही दोनों में भारत-पाकिस्तान का विषय शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘वह फिल्म एक प्रेम कहानी पर आधारित थी और यह एक पारिवारिक फिल्म है, जो एक परिवार की कहानी पर आधारित है।’’

जिंटा ने कहा कि फिल्मों में वापसी करना एक ‘बहुत सुखद अनुभव’ रहा, खासकर इसलिए क्योंकि वह फिर से देओल के साथ काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि फिल्म पर काम करते हुए उन्हें ‘घर जैसा’ महसूस हुआ और बीच के सालों में उन्होंने अपनी जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर ध्यान दिया, जिसमें उनकी ‘स्पोर्ट्स वेंचर्स’ भी शामिल थे।

करण देओल ने कहा कि अपने पिता के साथ स्क्रीन साझा करना एक सपना सच होने जैसा था। जब उनसे पूछा गया कि क्या सनी देओल ने फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें कोई खास टिप्स दिए, तो करण ने कहा कि सिर्फ संतोषी जी ने ही जरूरी निर्देश दिए।

वर्ष 2019 में अपने पिता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘पल पल दिल के पास’ से डेब्यू करने वाले करण ने कहा कि असल जिंदगी के पिता के साथ एक भावनात्मक कहानी में काम करने से कई दृश्य मौलिक और सहज लगे।

उन्होंने इस अनुभव को ‘अविश्वसनीय’ बताया। शबाना आजमी, अली फजल और अभिमन्यु सिंह की अहम भूमिकाओं वाली फिल्म ‘बंटवारा 1947’ सिनेमाघरों में 14 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली है।

भाषा किशोर आनन्द संतोष

संतोष


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