राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला : एसआईटी जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला : एसआईटी जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं
लखनऊ, 27 जून (भाषा) अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन का मामला गहराता जा रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच में चढ़ावे के प्रबंधन में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिसके बाद नकदी और बहुमूल्य चढ़ावे की गणना से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अब तक की जांच के अनुसार, चढ़ावे की राशि किस तरह निकाली गई और कुल कितनी रकम का गबन हुआ, इसकी जांच अभी जारी है। हालांकि, एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़ी कई बड़ी खामियों की ओर संकेत किया है।
सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार नकदी की गिनती के दौरान सुरक्षा गार्ड की तैनाती, गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले कर्मचारियों की तलाशी तथा चढ़ावे की गिनती से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को 180 दिन तक सुरक्षित रखने जैसी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि नियमों के विपरीत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व चालक रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास कई ‘हुंडियों’ (दानपात्रों) की चाबियां थीं।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘मंदिर में कई हुंडियां थीं। जिन हुंडियों की चाबियां टिन्नू यादव के पास थीं, उनमें आए चढ़ावे की नकदी एसओपी के पालन में ढिलाई के कारण कथित रूप से निकाल ली गई। गबन के सटीक तरीके का अभी पता लगाया जा रहा है।’’
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अधिकारियों और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रतिनिधियों की बैठक में वर्ष 2025 में एसओपी तैयार की गई थी। उस समय ट्रस्ट के अधिकारियों को चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका हुई थी।
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा और एसबीआई के गोविंद मिश्रा ने औपचारिक रूप से एसओपी को मंजूरी दी थी।
सूत्र ने कहा, ‘‘एसओपी के तहत चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य किया गया था। सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज (एसआईएस) के माध्यम से सुरक्षा गार्ड की तैनाती, गिनती कक्ष में आने-जाने वाले सभी कर्मियों की नियमित तलाशी तथा औचक निरीक्षण का भी प्रावधान था, लेकिन इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।’’
एसआईटी ने एक और गंभीर अनियमितता यह पाई कि चढ़ावे की गिनती से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को निर्धारित 180 दिनों के बजाय केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा गया।
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की गिनती के प्रभारी और आरोपी सुभाष श्रीवास्तव की नियुक्ति ट्रस्ट के शीर्ष तीन पदाधिकारियों में से एक की सिफारिश पर की गई थी।
यह विवाद सात जून को उस समय शुरू हुआ था, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन का आरोप लगाया था। हालांकि, चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ‘‘आंतरिक लेखा परीक्षण के दौरान कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है।’’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को गठित एसआईटी की जांच ने प्रारंभिक तौर पर राय के दावे को गलत साबित कर दिया। सूत्रों ने स्वीकार किया कि जांच के निष्कर्षों की गंभीरता को देखते हुए राम मंदिर के प्रबंधन तंत्र में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं।
सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि एसआईटी ने मात्र छह दिनों में कथित कुप्रबंधन, चढ़ावे में गबन, गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक अनियमितताओं का खुलासा कर दिया। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को सरकार को सौंपी गई थी।
गौरतलब है कि 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद से विशेषकर प्रयागराज महाकुंभ के दौरान, राम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे नकद और बहुमूल्य चढ़ावे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
एसआईटी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद 25 जून को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव तथा रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, टिन्नू यादव ने अपने रिश्तेदार और सह-आरोपी मनीष कुमार यादव को मंदिर की नकदी गिनती इकाई में नौकरी दिलाई थी। सभी आठ आरोपियों को सोमवार तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, अब तक आठ में से छह आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद तथा कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘जांच अभी जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आए गंभीर तथ्यों के बाद ट्रस्ट को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करानी पड़ी और कार्रवाई तेजी से हुई।’’
उन्होंने बताया, ‘‘विवाद सामने आने और एसआईटी के गठन से ठीक पहले चढ़ावे की गिनती वाले कक्ष के पास स्थित एक शौचालय से ढाई लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए थे।’’
सूत्रों ने कहा कि ये खुलासे ‘बेहद शर्मनाक’ हैं, क्योंकि ट्रस्ट का प्रबंधन संभालने वाले जिम्मेदार लोग कथित गड़बड़ी से पूरी तरह अनभिज्ञ बने रहे।
भाषा
मनीष, चंदन, आनन्द रवि कांत

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