कभी दंगों, फतवों व पलायन के कारण बदनाम सहारनपुर आज विकास, प्रगति की नई पहचान बना: योगी
कभी दंगों, फतवों व पलायन के कारण बदनाम सहारनपुर आज विकास, प्रगति की नई पहचान बना: योगी
सहारनपुर (उप्र), सात मई (भाषा) उत्तर प्रदेश में जाति आधारित राजनीति को बढावा देने के लिये प्रदेश की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रदेश अब ‘तुष्टिकरण’ और ‘फतवा’ की राजनीति से दूर विकास और लोक कल्याण आधारित व्यवस्था की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब “तुष्टीकरण” नहीं, बल्कि “संतुष्टिकरण” की राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकारी संसाधनों का उपयोग कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल, अवैध कब्जों और जातीय-साम्प्रदायिक समीकरणों को साधने में किया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार उन्हीं संसाधनों को सड़क, विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कॉलेज, आरसीसी ड्रेन, एक्सप्रेसवे तथा धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास जैसे जनहितकारी कार्यों में लगा रही है।
योगी सहारनपुर में आयोजित 2,131 करोड़ रुपये की 325 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास एवं लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में सरकारी धन का इस्तेमाल जातीय और सांप्रदायिक तुष्टीकरण से जुड़े कार्यों में अधिक होता था, जबकि वर्तमान सरकार उसी संसाधन को आधारभूत ढांचे और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं पर खर्च कर रही है।
उन्होंने कहा कि अब सड़क, विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कॉलेज, आरसीसी ड्रेन, एक्सप्रेसवे तथा धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सहारनपुर, जिसकी पहचान कभी दंगों, फतवों और पलायन जैसी घटनाओं से जुड़ गई थी, आज तेजी से विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक प्रगति के केंद्र के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मां शाकम्भरी धाम के पुनरुद्धार, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित एयरपोर्ट, स्पोर्ट्स कॉलेज, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं तथा इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब जैसी योजनाओं के माध्यम से जिले में विकास को नई गति मिली है।
योगी ने कहा कि सहारनपुर वही जनपद है, जहां वर्ष 2013 से 2016 के बीच दंगे, कर्फ्यू, पलायन और अराजकता का माहौल बना रहता था।
उन्होंने कहा, ‘‘उस दौर में शिक्षा, खेल और उद्योग के क्षेत्र में कोई बड़ा केंद्र विकसित नहीं हो पाया था। किसान परेशान थे, युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे थे और व्यापारी भय के वातावरण में काम करने को मजबूर थे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि फतवों और कुसंस्कृति के कारण देवबंद की पहचान भी प्रभावित हुई थी।
उन्होंने 2016 के सिख विरोधी दंगों और मुजफ्फरनगर-शामली हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश अशांति की चपेट में था, लेकिन समस्याओं को सुनने और समाधान करने वाला कोई नहीं था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में डबल इंजन सरकार बनने के बाद सहारनपुर ने विकास और प्रगति की नई दिशा में कदम बढ़ाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, जिले की विश्वस्तरीय काष्ठ कला को नया मंच और पहचान मिली है तथा आज सहारनपुर अपनी सांस्कृतिक विरासत, उद्योग और विकास कार्यों के दम पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है।
एक बयान के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डबल इंजन सरकार की नीतियों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी हैं।
उन्होंने कहा कि पहले सहारनपुर से दिल्ली पहुंचने में करीब छह घंटे और लखनऊ पहुंचने में 12 से 14 घंटे तक का समय लगता था, लेकिन अब एक्सप्रेसवे और आधुनिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं के चलते दिल्ली की दूरी घटकर लगभग ढाई घंटे और लखनऊ की दूरी करीब छह घंटे रह गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ तत्व विकास की राह में बाधा उत्पन्न करते हुए जाति और तुष्टीकरण की राजनीति के जरिए समाज को बांटने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब जनता विकास, सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मुद्दों के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि जब अच्छी सरकारें चुनी जाती हैं तो उसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आते हैं और सहारनपुर आज इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
भाषा जफर जोहेब रंजन
रंजन

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