सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने किया दुनिया की सबसे बड़ी पित्ताशय पथरी निकालने का दावा

सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने किया दुनिया की सबसे बड़ी पित्ताशय पथरी निकालने का दावा

सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने किया दुनिया की सबसे बड़ी पित्ताशय पथरी निकालने का दावा
Modified Date: May 30, 2026 / 06:26 pm IST
Published Date: May 30, 2026 6:26 pm IST

इटावा (उप्र), 30 मई (भाषा) सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने न्यूनतम चीर-फाड़ वाली लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिये एक बुजुर्ग महिला के पित्ताशय का आपरेशन करके ‘दुनिया की सबसे बड़ी’ पथरी को सफलतापूर्वक बाहर निकालने का दावा किया है।

विश्वविद्यालय के एक बयान के अनुसार शल्य चिकित्सकों ने लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिये पित्ताशय की एक ऐसी पथरी को सफलतापूर्वक निकाला है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी पित्ताशय की पथरी बताया जा रहा है।

बयान के अनुसार 200 ग्राम की यह पथरी 14सेंटीमीटर (सेमी) लंबी, 8.3 सेमी चौड़ी तथा 4.2 सेमी मोटी थी जिसे ‘गैस्ट्रो सर्जन’ डॉक्टर कन्हैया लाल चौधरी और उनकी टीम ने 62 वर्षीय एक महिला मरीज के पित्ताशय से निकाला।

बयान में दावा किया गया है कि सैफई में निकाली गई यह पथरी, त्रिनिदाद और टोबैगो में लैप्रोस्कोपी के जरिये पहले निकाली गई एक अन्य पथरी से भी बड़ी थी। बयान के अनुसार एक मेडिकल जर्नल में दर्ज जानकारी के अनुसार उस पथरी का आकार 12.8 सेमी लंबा एवं सात सेमी चौड़ा था और उसका वजन 178 ग्राम था।

विश्वविद्यालय ने बताया कि इतनी ज्यादा बड़ी पित्ताशय की पथरी को आमतौर पर ‘ओपन सर्जरी’ (पेट खोलकर की जाने वाली सर्जरी) के जरिए ही निकालने के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसमें कई तकनीकी चुनौतियां शामिल होती हैं।

बयान के मुताबिक हालांकि, डॉक्टर चौधरी और उनकी टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की मदद से यह ऑपरेशन किया और एक जटिल सर्जरी के बाद पथरी को सफलतापूर्वक निकाल दिया।

डॉक्टर चौधरी ने कहा कि लैप्रोस्कोपी के जरिए इतनी बड़ी पथरी को निकालने के लिए उच्च स्तर की शल्य चिकित्सीय विशेषज्ञता, सावधानी और तकनीकी दक्षता की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर अजय सिंह ने सर्जिकल टीम को बधाई दी और इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि यह सफलता आधुनिक शल्य क्रिया तकनीकों की क्षमताओं और भारतीय चिकित्सा पेशेवरों की विशेषज्ञता को जाहिर करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की सेवा करने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

भाषा सलीम राजकुमार

राजकुमार


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