उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव 900 नयी अदालतों के गठन पर उच्च न्यायालय में हुए पेश

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव 900 नयी अदालतों के गठन पर उच्च न्यायालय में हुए पेश

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव 900 नयी अदालतों के गठन पर उच्च न्यायालय में हुए पेश
Modified Date: July 27, 2026 / 11:16 pm IST
Published Date: July 27, 2026 11:16 pm IST

लखनऊ, 27 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश में 900 नयी अदालतों के गठन में हो रही देरी पर अदालत की सख्ती के बाद राज्य के मुख्य सचिव इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के सामने पेश हुए।

उन्होंने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री से प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और शेष औपचारिकताएं पूरी कर शासनादेश जारी करने के लिए दो माह का समय चाहिए। इस पर अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को तय की है।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ 9,149 नयी अदालतों के गठन के माध्यम से राज्य के न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने संबंधी स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने 23 जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने पहले चरण में 900 अदालतें स्थापित करने के लिए अक्टूबर 2024 में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। इनमें 225 उच्च न्यायिक सेवा अदालतें, 375 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालतें और 300 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अदालतें शामिल हैं।

अदालत ने पहले के आदेश में कहा था कि राज्य सरकार कोई ठोस निर्णय लेने के बजाय बार-बार नए और अवांछित मुद्दे उठा रही है, जिससे अदालतों के गठन में देरी हो रही है।

पीठ ने नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (विधि) को तलब किया था। अदालत के आदेश के अनुपालन में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (विधि) के साथ 23 जुलाई को अदालत में उपस्थित हुए।

उन्होंने बताया कि प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है। अब इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद नयी अदालतों के गठन संबंधी शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।

भाषा सं जफर आशीष

आशीष


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