लखनऊ, 27 मई (भाषा) लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में मलिहाबाद किले के नाम से मशहूर एक स्थल को लेकर विवाद के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बकरीद से पहले पुलिस ने अतिरिक्त बल और पीएसी कर्मियों को तैनात किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह विवाद मलीहाबाद के कासमंडी इलाके में करीब 25-30 बीघा जमीन को लेकर है जहां कुछ स्थानीय लोग विशेषकर पासी समुदाय के लोग इस स्थान के महाराजा कांसा पासी से जुड़ा होने का दावा करते हैं और उनका कहना है कि इसे एक मस्जिद के बजाय मंदिर परिसर माना जाना चाहिए।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह विवाद करीब डेढ़ साल से है और उस स्थान पर बाहरी लोगों द्वारा कथित तौर पर नमाज पढ़ना शुरू करने के बाद से यह विवाद बढ़ा है।
एक स्थानीय निवासी ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया कि यह मुद्दा हिंदू-मुस्लिम विरोध का नहीं है, बल्कि बाहरी लोगों के वहां नमाज के लिए आने का है।
उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को अपने घरों के पास की मस्जिदों में नमाज पढ़ना चाहिए। स्थानीय लोगों विशेषकर पासी समुदाय के लोगों को नमाज के लिए बाहरी लोगों के वहां आने पर आपत्ति है।’’
एक अन्य स्थानीय निवासी ने दावा किया कि पूर्व में उस स्थान पर कभी नमाज नहीं पढ़ी जाती रही और यह प्रथा करीब डेढ़ साल पहले ही शुरू हुई जिससे विवाद पैदा हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग वह स्थान मस्जिद का होने और पास के ढांचे के मजार होने का दावा करते हैं, जबकि स्थानीय लोग इसे शिव मंदिर और महाराजा कांसा पासी की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा मानते हैं।
मंगलवार को स्थानीय पासी समुदाय के कुछ लोगों ने हिंदू महासभा के कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नमाज पढ़ने के लिए बाहरी लोगों के आने पर आपत्ति की। संगठन के एक स्थानीय पदाधिकारी का दावा है कि वह किला महाराजा कांसा पासी को समर्पित था और इस मामले को अदालत ले जाया जाएगा।
भाषा राजेंद्र शोभना
शोभना