सुग्रीव किला मंदिर की जमीन का 1.21 करोड़ रुपये सरकार जमा करे, आठ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा

सुग्रीव किला मंदिर की जमीन का 1.21 करोड़ रुपये सरकार जमा करे, आठ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा

सुग्रीव किला मंदिर की जमीन का 1.21 करोड़ रुपये सरकार जमा करे, आठ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा
Modified Date: August 17, 2026 / 08:31 pm IST
Published Date: August 17, 2026 8:31 pm IST

लखनऊ, 17 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को अयोध्या में सुग्रीव किला मंदिर की भूमि के विक्रय की बकाया राशि 1.20 करोड़ रुपये आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ जमा करने का निर्देश दिया है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि मंदिर की जमीन पर कब्जा लेने के बाद तय रकम का भुगतान नहीं करना और बाद में जमीन को नजूल/सरकारी संपत्ति बताना अधिकारियों का ऐसा आचरण है, जिसे निष्पक्ष, उचित और तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश श्री ठाकुर राम जानकी सुग्रीवजी विराजमान मंदिर (अयोध्या) की याचिका पर दिया।

मामला सुग्रीव किला स्थित मंदिर की 1512 वर्गमीटर भूमि, खसरा संख्या 246 और खाता संख्या 44/2 से जुड़ा है। यह भूमि राम जन्मभूमि मंदिर के समीप स्थित है। मंदिर का दावा है कि 1858 से लगातार हुए राजस्व बंदोबस्तों में उसका स्वामित्व दर्ज रहा है।

याची के अनुसार, 22 दिसंबर 2023 को भूमि के संबंध में पंजीकृत विक्रय विलेख हुआ था। कुल विक्रय मूल्य 1,38,44,559 रुपये तय हुआ था। इसमें 1,20,96,000 रुपये भूमि की कीमत और 17,48,559 रुपये निर्माण की लागत थी। निर्माण की राशि का भुगतान कर दिया गया, लेकिन भूमि की कीमत का भुगतान नहीं हुआ।

मंदिर का कहना था कि अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 15 दिन के भीतर आरटीजीएस के माध्यम से रकम खाते में भेज दी जाएगी। इस भरोसे पर मंदिर ने तत्काल भूमि का कब्जा सौंप दिया। हालांकि, भुगतान नहीं किया गया और उसे उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि मंदिर के सरवराहकार को संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं था और जमीन नजूल संपत्ति है, जो सरकार की है। सरकार ने यह भी बताया कि विक्रय विलेख निरस्त कराने के लिए सक्षम दिवानी अदालत में वाद दायर किया गया है, जो लंबित है।

अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने इस आदेश के जरिए भूमि के स्वामित्व का विवाद तय नहीं किया है। स्वामित्व का प्रश्न दिवानी अदालत में पूर्ण सुनवाई के बाद तय होगा।

सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 22 दिसंबर 2023 के विक्रय विलेख के 15 दिन पूरे होने के बाद की अवधि से आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित बकाया राशिचार सप्ताह के भीतर जमा करे।

यह रकम संबंधित दिवानी अदालत के नाम से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाले सावधि जमा में रखी जाएगी। यह राशि लंबित वाद में पारित होने वाले आदेश के अधीन रहेगी।

पीठ ने 2024 में दायर लंबित स्वामित्व वाद की सुनवाई भी तेज करने और अधिमानतः एक वर्ष के भीतर उसका निस्तारण करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने स्वामित्व और कानून से जुड़े सभी प्रश्नों को दिवानी अदालत के निर्णय के लिए खुला रखा ।

भाषा सं जफर अमित राजकुमार

राजकुमार


लेखक के बारे में