बांग्लादेशी न्यायाधिकरण ने पूर्व पुलिस प्रमुख और दो अन्य को मौत की सजा सुनाई
बांग्लादेशी न्यायाधिकरण ने पूर्व पुलिस प्रमुख और दो अन्य को मौत की सजा सुनाई
ढाका, 26 जनवरी (भाषा) ढाका के पूर्व पुलिस आयुक्त और दो अन्य पुलिस अधिकारियों को बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के हिंसक प्रदर्शनों में उनकी कथित भूमिका के लिए सोमवार को मौत की सजा सुनाई। इन प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था।
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ढाका महानगर पुलिस (डीएमपी) के पूर्व आयुक्त हबीब-उर-रहमान, डीएमपी के पूर्व संयुक्त आयुक्त सुदीप कुमार चक्रवर्ती और अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद अख्तर-उल-इस्लाम को सजा सुनाई। यह सजा उनकी गैर हाजिरी में हुई सुनवाई के बाद सुनाई गई है। इस पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मोर्तुजा मोजुमदार ने की।
फैसले में कहा गया, ‘इन तीनों (दोषियों)…का दर्जा अपने अधीनस्थों से ऊंचा था और ये उत्तरदायी हैं। उन्हें दोषी पाया गया है और उन्हें मौत की सजा सुनाई जाती है।’
न्यायाधिकरण ने ढाका के सहायक पुलिस आयुक्त मोहम्मद इमरुल को छह साल, निरीक्षक अरशद हुसैन को चार साल और तीन कांस्टेबल सुजोन हुसैन, इमाज हुसैन और नासिर-उल-इस्लाम को तीन साल की जेल की सजा सुनाई।
सहायक आयुक्त इमरुल पर भी उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया। न्यायाधिकरण ने पहले इमरुल और मौत की सजा पाए तीनों पूर्व अधिकारियों को भगोड़ा घोषित कर दिया था जबकि अन्य लोगों ने व्यक्तिगत रूप से मुकदमे का सामना किया।
मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई करने वाली आईसीटी-बीडी ने पांच अगस्त, 2024 को ढाका के चंखारपुल इलाके में पुलिस की गोलीबारी में छह लोगों की मौत की घटना के लिए आरोपी को दोषी पाया। इसी दिन तत्कालीन सरकार गिर गई थी।
आईसीटी-बीडी के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने कारावास की सजा पाने वालों के लिए ‘अपेक्षाकृत नरम सजाओं’ पर असंतोष व्यक्त किया।
छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की क्रूर कार्रवाई के लिए आईसीटी-बीडी ने पिछले साल नवंबर में ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के आरोप में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी।
भाषा नोमान नरेश
नरेश


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